मध्य प्रदेश

Baba Achalnath in Rang Panchami: रंगपंचमी के दिन ग्वालियर में बाबा अचलनाथ ने की नगर यात्रा...

Baba Achalnath in Rang Panchami: होली त्योहार के पांचवे दिन रंगपंचमी मनाया जाता है। इस दिन जगह- जगह पर कई यात्राएं निकाली जाती है। ऐसे ही ग्वालियर में भी बाबा अचलनाथ की रंगपंचमी के दिन यात्रा निकाली गई। इस धार्मिक समारोह में काफी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, जहां बैंड और डीजे की धुनों पर ग्वालियरवासी नाचते-गाते नजर आए। यात्रा के दौरान फूलों की वर्षा और गुलाल से होली खेली गई, जिससे पूरा शहर उत्सवमय हो गया।

अचलेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना से शुरु हुई यात्रा

अचलेश्वर महादेव मंदिर से यात्रा की शुरुआत हुई, जहां बाबा अचलनाथ की विशेष पूजा और आरती संपन्न की गई। इसके बाद बाबा अचलनाथ नगर भ्रमण के लिए निकले। जगह- जगह श्रद्धालुओं ने बाबा पर फूलों और गुलाल की बरसा की। फिर आपस में फूलों और रंगों से होली खेलते हुए आगे बढ़े। कई स्थानों पर यात्रा का स्वागत किया गया, साथ ही प्रसाद वितरण भी हुआ।

   

शहर के इन जगहों से गुजरी यात्रा

यह यात्रा हर साल रंगपंचमी पर निकली जाती है। शहर के विभिन्न इलाकों से होकर गुजरती है, इस बार सवारी दल बाजार, लोहिया बाजार, दौलतगंज, महाराज बाड़ा और सराफा बाजार जैसे प्रमुख क्षेत्रों से यात्रा निकली गई। शाम करीब 4 बजे यात्रा राम मंदिर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा कर बाबा का अभिनंदन किया। पूरे शहर में उत्साह का माहौल रहा और लोग बैंड की धुन पर झूमते नजर आएं।

बाबा भगवान राम और चक्रधर के साथ खेलेंगे होली

बाबा अचलनाथ राम मंदिर पहुंचने और वहां भगवान राम के साथ फूलों और गुलाल से होली खेली। इसके अलावा, सनातन धर्म मंदिर में चक्रधर भगवान के साथ भी रंगोत्सव का आयोजन किया गया। इस अनोखे धार्मिक कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह देखने को मिला और मंदिर प्रबंधन ने इसे सफल बनाने के लिए विशेष इंतजाम भी किए।

एक भक्त ने 5 किलो चांदी की दान

कार्यक्रम के समापन पर बाबा अचलनाथ की सवारी वापस मंदिर लौटेगी, फिर वहां बाबा की आरती की जाएगी इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। इस दौरान एक भक्त ने मंदिर के स्तंभों के लिए करीब 5 किलो चांदी का दान किया।

मंदिर प्रबंधन ने बताया कि, आज सभी दानपेटियां भी खोली जाती हैं। रंगपंचमी के इस भव्य समारोह में बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं, जो शहर की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाती है।