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Kartikeya Temple Gwalior: देश का पहला और एकमात्र कार्तिकेय मंदिर!

Kartikeya Temple Gwalior: मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में एक मात्र कार्तिकेय मंदिर है, यह मंदिर करीब 450 साल पुराना मंदिर है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यह सिर्फ साल में एक दिन ही खुलता है। बताया जाता है कि, यह मंदिर साल में एक बार सिर्फ 'कार्तिक पूर्णिमा' के दिन ही खुलता है। उस दिन यह मंदिर 24 घंटे तक खुला रहता है। उस दिन भक्त दूर – दूर से भगवान के दर्शन करने इस मंदिर में कार्तिकेय भगवान के दर्शन करने  पहुंचते हैं।

देश का एकमात्र कार्तिकेय मंदिर

यह मंदिर मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर के जीवाजीगंज इलाके में स्थित है। कहा जाता है कि,  यह प्रदेश का ही नहीं बल्कि देश का एक मात्र मंदिर है, जहां कार्तिकेय विराजमान है। खास बात यह है कि यह मंदिर साल में सिर्फ एक बार ही खुलता है। इस मंदिर में कार्तिकेय के अलावा हनुमान, गंगा, जमुना, सरस्वती और लक्ष्मीनारायण आदि भगवान विराजमान हैं। इस मंदिर के पट कार्तिक पूर्णिमा के दिन 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं।

आखिर साल में सिर्फ एक दिन क्यों खुलता है मंदिर?

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, एक बार कार्तिकेय और गणेश के बीच बहस छिड़ी थी तब भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने दोनों पुत्र गणेश और कार्तिकेय से कहा था कि- तुम दोनों में से जो तीनों लोको की परिक्रमा करके सबसे पहले हमारे पास आएगा, उसकी पूजा सबसे पहले की जाएगी। उसे प्रथम पूज्य माना जाएगा। भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के कहने पर तुरंत कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार हुए और तीनों लोकों की परिक्रमा करने निकल पड़े। वहीं भगवान गणेश परिक्रमा करने की वजाह वो माता – पिता की परिक्रमा करने लगे। परिक्रमा पूरी करने के बाद उन्होंने कहा मेरी परिक्रमा पूरी हो गई। इस पर माता पार्वती ने कहा कि कैसे- तब इसका जबाव देते हुए भगवान गणेश ने कहा – ‘माता-पिता में तीनों लोक समाहित होते।’

भगवान गणेश की बुद्धिमत्ता से हुए माता - पिता प्रसन्न

गणेश भगवान का जबाव सुनकर माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ उनकी बुद्धिमत्ता देखकर प्रसन्न हो गए। उन्हें विजेता घोषित कर दिया। तब भगवान भोलेनाथ ने उन्हें आशीर्वाद दिया था कि- उनकी पूजा सभी देवी देवताओं से पहले होगी और उन्हें प्रथम पूज्य देवता माना जाएगा।

कार्तिकेय ने नाराजगी में दिया श्राप

किवदंती के है कि, गणेश जी को प्रथम पूज्य देवता बनाने से कार्तिकेय माता पार्वती से नाराज हो गए थे। गुस्से में गुफा के अंदर चले गए। और कहा अब वो किसी को दर्शन नहीं देंगे। कार्तिकेय ने श्राप दिया कि- अगर किसी महिला ने उनके दर्शन किए तो वो विधवा हो जाएगी। और पुरुष 7 जन्म तक नरक में जाएंगे। इस पर भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती ने उन्हें समझाया, तब कार्तिकेय का गुस्सा शांत हुआ फिर उन्हें उनकी गलती का पछतावा भी हुआ। और उन्होंने साल में एक बार अपने जन्मदिन के मौके कार्तिक पूर्णिमा पर दर्शन देने के लिए राजी हुए। इसी वजह से ग्वालियर में बना यह कार्तिकेय मंदिर साल में एक बार खुलता है।