बिहार में रोड ऐक्सिडेंट में 1.5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज, डिप्टी CM ने किया एलान

Anshuman Parashar

बिहार में सड़क हादसों के घायलों को मिलेगा ₹1.5 लाख तक मुफ्त इलाज। उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने परिवहन विभाग की समीक्षा कर ITMS लागू करने और जल परिवहन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। ड्राइवरों के लिए इना

न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और हाईटेक बनाने का नया रोडमैप तैयार किया है। रविवार को हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग का मुख्य लक्ष्य जनता की सुरक्षा और सुविधा है। इस दौरान सड़क सुरक्षा से लेकर जल परिवहन तक के लिए ऐतिहासिक दिशा-निर्देश जारी किए गए।

घायलों को 1.50 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज 

सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को रोकने के लिए सरकार ने एक बड़ा मानवीय फैसला लिया है। अब राज्य के आपातकालीन ट्रॉमा सेंटर में सड़क हादसे के शिकार लोगों को 1 लाख 50 हजार रुपये तक का मुफ्त इलाज दिया जाएगा। परिवहन सचिव राज कुमार ने बताया कि इसका उद्देश्य घायलों को 'गोल्डन आवर' (हादसे के तुरंत बाद का समय) में उचित चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित कराना है।

स्मार्ट होगा ट्रैफिक: ITMS से थमेगा जाम का झंझट

राजधानी पटना समेत बिहार के प्रमुख शहरों में अब ट्रैफिक जाम गुजरे जमाने की बात होगी। राज्य में पीपीपी (PPP) मोड पर इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लागू किया जा रहा है। इस तकनीक के जरिए यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तीसरी आंख (CCTV) की नजर रहेगी और ट्रैफिक का प्रबंधन पूरी तरह से ऑटोमैटिक होगा।

लापरवाह ड्राइवरों पर सख्ती: ट्रेनिंग नहीं ली तो गिरेगी गाज

भारी वाहन (HMV) चालकों के लिए सरकार अब सख्त रुख अपना रही है। उपमुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि जो चालक तीन रिमाइंडर के बाद भी अनिवार्य ट्रेनिंग के लिए नहीं आएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, 1 मई 2026 से ट्रेनिंग लेने वाले चालकों को प्रोत्साहित करने के लिए 100 रुपये अल्पाहार और 200 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। हर जिले में अब पूरे साल ड्राइविंग टेस्ट देने की स्थायी व्यवस्था भी शुरू हो रही है।

माइनर और मेजर कैटेगरी

सड़क सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए अब दुर्घटनाओं का गहराई से विश्लेषण होगा। हादसों को माइनर और मेजर श्रेणियों में बांटकर यह पता लगाया जाएगा कि उनके पीछे की असल वजह क्या है। इसी डेटा के आधार पर भविष्य की सुरक्षा योजनाएं तैयार की जाएंगी।