'वर्दी और पिस्तौल मिली तो अहंकारी न बनें, ऐसे पुलिसवाले डूब मरें', DGP विनय कुमार का अपनी ही पुलिस पर बड़ा प्रहार !

Anshuman Parashar

डीजीपी विनय कुमार ने पुलिस को संवेदनशीलता और विनम्रता की सीख दी। उन्होंने बढ़ते गैंग कल्चर, महिला अपराधों और पुलिसिया भ्रष्टाचार पर कड़ी नाराजगी जताते हुए दोषियों को 'डूब मरने' तक की नसीहत दे डाली।

न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क( अस्मित, पटना) बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने पुलिसिंग, महिला सुरक्षा और समाज में बढ़ते अपराधों को लेकर बेबाक बयान दिया है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को कर्तव्य के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ समाज और माता-पिता को भी उनकी जिम्मेदारियों का अहसास कराया।

पुलिस बल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

डीजीपी ने बताया कि 2013 में सभी जिलों में महिला थानों का निर्माण किया गया था। आज स्थिति यह है कि हर थाने में एक महिला हेल्प डेस्क सक्रिय है। उन्होंने गर्व के साथ साझा किया कि पहले कई जिलों में महिला पुलिस की भारी कमी थी, लेकिन आज पुलिस बल में लगभग 30 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं, जो एक बड़ा बदलाव है।

युवाओं में बढ़ती गैंग संस्कृति और मोतिहारी हत्याकांड

मोतिहारी में हुई छात्र की हत्या पर चिंता जताते हुए डीजीपी ने कहा कि आजकल 10-15 युवाओं के छोटे-छोटे गैंग बन रहे हैं, जो सोशल मीडिया पर अपना प्रचार करते हैं। उन्होंने खुलासा किया कि मोतिहारी की घटना 'महिला मित्र' को लेकर हुए विवाद के कारण हुई। उन्होंने माता-पिता को आगाह करते हुए कहा कि बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखना उनकी बड़ी जिम्मेदारी है।

गैंगरेप और एसिड अटैक: बढ़ती घटनाओं पर चिंता

डीजीपी ने स्वीकार किया कि पहले गैंगरेप जैसी घटनाएं दुर्लभ होती थीं और एक घटना से पूरा जिला हिल जाता था। लेकिन आज समाज में ऐसी घटनाएं हर 3-4 दिन पर सामने आ रही हैं। एसिड अटैक के मामलों पर उन्होंने कहा कि इलाज से लेकर अन्य सुविधाओं तक हर संभव कार्रवाई की जा रही है, लेकिन व्यवस्था की खामियों पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने दानापुर का उदाहरण देते हुए कहा कि 10 साल से एक व्यक्ति की गवाही न होना गंभीर विषय है।

'सिर्फ वेतन के लिए नौकरी न करें पुलिसकर्मी'

पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को संवेदनशील होना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यह न समझें कि अनुसंधान हो या न हो, वेतन तो आ ही जाएगा।' उन्होंने बताया कि यौन उत्पीड़न के केवल 2 प्रतिशत मामले ही दर्ज हो पाते हैं, बाकी दबा दिए जाते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अन्य राज्यों की तुलना में बिहार में महिला अपराध कम हैं।

दहेज और धोखाधड़ी के मामलों पर पुलिस की सुस्ती

जनता दरबार में आ रही शिकायतों का जिक्र करते हुए डीजीपी ने जहानाबाद और सीतामढ़ी के मामलों पर चर्चा की। जहानाबाद में 50 लाख दहेज लेने के बाद दूल्हा शादीशुदा निकला, वहीं सीतामढ़ी में एक दरोगा ने पद मिलने के बाद दूसरी शादी कर ली। उन्होंने सीतामढ़ी एसपी की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में 'सॉफ्ट' होने के बजाय कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

भ्रष्टाचार और अहंकार पर कड़ी फटकार

महिला पुलिस पदाधिकारियों को नसीहत देते हुए डीजीपी ने कहा, 'वर्दी और पिस्तौल मिलने का मतलब अहंकार (Arrogance) पालना नहीं है। आपको जनता से सॉफ्ट होकर बात करनी चाहिए।' उन्होंने मोतिहारी के उस मामले की कड़ी निंदा की जहां पीड़ित से ही पैसे और गाड़ी की मांग की गई थी। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि ऐसे पुलिस अधिकारियों को "डूब मरना चाहिए" जो पीड़ितों का शोषण करते हैं।

महिला थाना प्रभारियों को निर्देश

उन्होंने निर्देश दिया कि महिला थाना प्रभारी केवल "टाइम पास" न करें। वे अपने इलाके के पुरुषों और महिलाओं से संवाद करें, अलग-अलग इलाकों का दौरा करें और पुलिस की उपस्थिति का अहसास कराएं ताकि अपराध पर लगाम लग सके।