बिहार में अब बिजली चोरों की खैर नहीं, स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियां ही करेंगी एनर्जी ऑडिटिंग

Anshuman Parashar

बिहार में बिजली चोरी रोकने के लिए अब स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियां ही अगले 10 साल तक 'एनर्जी अकाउंटिंग' करेंगी। ट्रांसफार्मर पर सिम आधारित डिवाइस लगाकर बिजली की खपत का रियल टाइम मिलान होगा।

न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार में बिजली चोरी पर पूरी तरह लगाम लगाने और पावर सप्लाई सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए ऊर्जा विभाग ने एक बड़ा और रणनीतिक फैसला लिया है। राज्य में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाली निर्माण कंपनियों को अब अगले एक दशक (10 वर्षों) के लिए 'ऊर्जा लेखांकन' (Energy Accounting) की कमान भी सौंप दी गई है। इस कड़े कदम के बाद कंपनियां न सिर्फ मीटर लगाएंगी, बल्कि फीडर और ट्रांसफार्मर के स्तर पर होने वाली बिजली की एक-एक यूनिट की खपत का बारीकी से विश्लेषण भी करेंगी।

क्या है 'एनर्जी अकाउंटिंग' और कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम?

बिजली कंपनियों के राजस्व नुकसान (Revenues Loss) को रोकने के लिए इस पूरी प्रक्रिया को बेहद आधुनिक और डिजिटल बनाया गया है:

खपत और लोड पर रहेगी पैनी नजर, पकड़ी जाएगी हर गड़बड़ी

इस व्यवस्था के तहत मीटरिंग कंपनियों की जिम्मेदारी सिर्फ डेटा जुटाने तक सीमित नहीं होगी। वे हर उपभोक्ता के बिजली इस्तेमाल करने के तौर-तरीकों का माइक्रो-लेवल पर अध्ययन करेंगी:

तकनीकी खराबी या सीधी चोरी? रिपोर्ट से साफ होगी तस्वीर

कंपनियां अपनी विस्तृत रिपोर्ट में बिजली की कमी के सटीक कारणों का खुलासा करेंगी।

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