भू-माफियाओं के खेल पर सरकार का डिजिटल लगाम, खास महल और सरकारी जमीनों की रजिस्ट्री अब होगी नामुमकिन

Anshuman Parashar

बिहार में खास महल और सरकारी जमीनों के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए एआई (AI) तकनीक की मदद ली जाएगी। नई व्यवस्था के तहत डिजिटल रिकॉर्ड की ऑनलाइन जांच कर सरकारी जमीन की रजिस्ट्री अपने आप रुक जाएगी।

न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार में सरकारी और खास महल की जमीनों पर फर्जी तरीके से कब्जा करने और उन्हें बेचने वाले भू-माफियाओं की अब खैर नहीं है। राज्य का राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग एक ऐसा अभेद्य सुरक्षा चक्र तैयार कर रहा है, जिससे सरकारी संपत्तियों की अवैध रजिस्ट्री पर पूरी तरह से पूर्णविराम लग जाएगा। इसके लिए मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की 'मानक संचालन प्रक्रिया' (SOP) को नए सिरे से खंगाला जा रहा है, ताकि लूपहोल्स को बंद कर सख्त गाइडलाइंस जारी की जा सकें।

सरकारी खजाने और जमीनों को चंपत लगाने वाले रैकेट का भंडाफोड़

पिछले कुछ वर्षों में राज्य के भीतर फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी जमीनों को निजी संपत्ति बताकर बेचने के कई हैरान करने वाले मामले उजागर हुए हैं। भू-माफियाओं ने कागजों में हेरफेर कर न सिर्फ सरकार को राजस्व की भारी चोट पहुंचाई, बल्कि आम जनता को भी कानूनी मुकदमों के जाल में फंसा दिया। इसी जमीनी हकीकत को देखते हुए सरकार अब तकनीकी स्तर पर ही इन फर्जीवाड़ों का रास्ता बंद करने जा रही है।

नई व्यवस्था में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) रचेगा चक्रव्यूह

इस बार की व्यवस्था पूरी तरह हाईटेक होने वाली है। नई प्रणाली के तहत बिहार की सभी जमीनों के डिजिटल रिकॉर्ड को रजिस्ट्री ऑफिस के सिस्टम से सीधे लिंक कर दिया जाएगा। अब जैसे ही कोई जमीन बिकने के लिए आएगी, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एआई (AI) की मदद से उसका ऑनलाइन वेरिफिकेशन करेगा। अगर जमीन का मालिकाना हक सरकार या खास महल के पास हुआ, तो सिस्टम बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के उस रजिस्ट्री को वहीं ब्लॉक (रिजेक्ट) कर देगा।

लापरवाही की तो नपेंगे अधिकारी, तय होगी जवाबदेही

सरकार सिर्फ सॉफ्टवेयर के भरोसे नहीं बैठ रही, बल्कि सिस्टम को चलाने वाले इंसानों की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है। नई गाइडलाइंस के तहत जिला स्तर के निबंधन अधिकारियों (रजिस्ट्री अफसरों) की जवाबदेही तय की जाएगी। अगर किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत से सरकारी जमीन की गलत रजिस्ट्री हो जाती है, तो उनके खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आम जनता को मिलेगा बड़ा फायदा, थमेंगे अदालती चक्कर

इस नई डिजिटल व्यवस्था का सबसे ज्यादा लाभ उन आम खरीदारों को मिलेगा, जो अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर जमीन खरीदते हैं और बाद में धोखाधड़ी के शिकार हो जाते हैं। अब लोग जमीन खरीदने से पहले ही उसकी वास्तविक स्थिति और प्रकृति (सरकारी या प्राइवेट) को आसानी से देख सकेंगे। इससे जमीन से जुड़े विवाद खत्म होंगे और पूरे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी।