नीतीश कुमार की शराबबंदी नीति फेल? NFHS के नए आंकड़ों ने बिहार में मचाया हड़कंप, पुरुषों में बढ़ा शराब पीने का ग्राफ

Anshuman Parashar

बिहार में शराबबंदी के बावजूद पुरुषों में शराब का सेवन 15.4% से बढ़कर 16.5% हुआ। NFHS की नई रिपोर्ट के अनुसार तंबाकू की लत घटी है, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी के मामले बढ़े हैं।

न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार में पिछले एक दशक से पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) 2024-25 के ताजा और अधिकारिक आंकड़ों ने राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी नीति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, तमाम बंदिशों और सख्ती के बावजूद बिहार के पुरुषों में शराब पीने की लत पहले के मुकाबले और बढ़ गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि राज्य के लोगों ने तंबाकू से थोड़ी दूरी बनाई है।

घटी तंबाकू की खपत, शराब के शौकीन बढ़े

सर्वेक्षण के अनुसार, बिहार में नशे के ट्रेंड में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जहां एक ओर जागरूक प्रयासों से तंबाकू का ग्राफ नीचे आया है, वहीं प्रतिबंधित शराब का ग्राफ ऊपर चढ़ गया है:

प्राइवेट अस्पतालों में सिजेरियन (ऑपरेशन) डिलीवरी का 'खेल' तेज

स्वास्थ्य क्षेत्र में संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में डिलीवरी) को लेकर बिहार ने लंबी छलांग लगाई है। अब राज्य में 81.1% डिलीवरी अस्पतालों में हो रही है (जो पहले 76.2% थी) और इनमें से 84% प्रसव एक्सपर्ट्स की देखरेख में हो रहे हैं।

लेकिन इस सुधार के पीछे एक चिंताजनक पहलू भी सामने आया है:

शिशु स्वास्थ्य में सुधार, मगर कुपोषण और मोटापे का दोहरा वार

नवजात बच्चों के पोषण को लेकर एक बेहद सुखद बदलाव यह आया है कि जन्म के पहले घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान कराने वाली माताओं की संख्या 31.1% से सीधे 51.9% पहुंच गई है, जो शिशुओं की इम्यूनिटी के लिए वरदान है।

इसके बावजूद, पोषण के मोर्चे पर बिहार आज भी दोहरी चुनौती से जूझ रहा है:

शुगर के मरीजों में मामूली राहत, वेलनेस सेंटर्स बने लाइफलाइन

लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी डायबिटीज (मधुमेह) के मोर्चे पर बिहार को थोड़ी राहत मिली है। राज्य में शुगर के मरीजों का कुल प्रतिशत पुरुषों में 8.3% से घटकर 7.9% और महिलाओं में 6.4% से घटकर 6.3% रह गया है।