Bihar Panchayat Fund 2026: बेहतर काम करने वाली पंचायतों को मिलेगा ज्यादा फंड, ग्राम पंचायतों की हिस्सेदारी 80%

sawan kumar

<br/>बिहार में पंचायतों को मिलने वाले फंड के वितरण का नया मॉडल लागू होने जा रहा है, जिसमें प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त राशि दी जाएगी।<br/><br/>

Bihar Panchayat Fund 2026

न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क 

पटना -  बिहार में ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के लिए पंचायती राज व्यवस्था के वित्तीय ढांचे में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर पंचायतों को मिलने वाली राशि अब केवल जनसंख्या और पारंपरिक मानकों के आधार पर नहीं बांटी जाएगी, बल्कि उनके कामकाज और उपलब्धियों को भी महत्व दिया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत जो पंचायतें विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करेंगी, स्थानीय स्तर पर संसाधन जुटाने में सफल होंगी और बेहतर प्रशासनिक प्रदर्शन दिखाएंगी, उन्हें अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जाएगी। इससे पंचायतों के बीच बेहतर कार्य करने की होड़ बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गति तेज होने की उम्मीद है।

हाईलाइट्स - 

ग्राम पंचायतों को मिलेगा अधिक वित्तीय अधिकार

नई व्यवस्था में सबसे अधिक लाभ ग्राम पंचायतों को मिलने वाला है। प्रस्तावित फॉर्मूले के अनुसार कुल अनुदान का 80 प्रतिशत हिस्सा सीधे ग्राम पंचायतों को मिलेगा, जबकि पहले यह हिस्सा 70 प्रतिशत था। दूसरी ओर पंचायत समितियों और जिला परिषदों के हिस्से में कटौती की गई है और दोनों को अब 10-10 प्रतिशत राशि ही आवंटित की जाएगी। सरकार का मानना है कि गांव स्तर पर होने वाले कार्यों का सीधा प्रभाव आम लोगों के जीवन पर पड़ता है। इसलिए सड़क, नाली, पेयजल, सामुदायिक भवन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए अधिक संसाधन ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में स्थानीय भागीदारी भी बढ़ेगी और विकास कार्यों की निगरानी अधिक प्रभावी हो सकेगी।

स्वच्छता, जल संरक्षण और प्रदर्शन पर रहेगा फोकस

16वें वित्त आयोग ने अनुदान खर्च करने के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं। कुल फंड का आधा हिस्सा टाइड फंड के रूप में होगा, जिसका उपयोग केवल स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और जल संरक्षण जैसी योजनाओं पर किया जा सकेगा। वहीं शेष 50 प्रतिशत राशि अनटाइड फंड होगी, जिसका उपयोग स्थानीय जरूरतों के अनुसार ग्रामसभा की स्वीकृति से किया जाएगा। आयोग ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच बिहार के लिए 51,923 करोड़ रुपये की अनुशंसा की है, जिसमें 10,384 करोड़ रुपये प्रदर्शन आधारित अनुदान शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से पंचायतें अधिक जवाबदेह बनेंगी और गांवों में विकास का एक नया मॉडल देखने को मिलेगा। सोलर स्ट्रीट लाइट, आंगनबाड़ी केंद्र, पेयजल योजनाएं और अन्य आधारभूत सुविधाएं पहले की तुलना में अधिक तेजी से विकसित हो सकेंगी।

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