बिहार में बोर्ड परीक्षा के लिए ये काम करवाना है अनिवार्य, 30 जून तक प्रक्रिया पूरी न होने पर छात्र नहीं दे पाएंगे एग्जाम

Anshuman Parashar

बिहार बोर्ड ने 2027 मैट्रिक-इंटर परीक्षा के लिए 'अपार आईडी' अनिवार्य कर दी है। 30 जून 2026 तक आईडी न बनने पर छात्र रजिस्ट्रेशन से वंचित हो सकते हैं। स्कूलों को काम में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है

न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने साल 2027 में आयोजित होने वाली मैट्रिक और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा दिशा-निर्देश जारी किया है। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि राज्य के कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक के हर छात्र-छात्रा के लिए 'अपार आईडी' (APAAR ID) बनवाना अब पूरी तरह अनिवार्य होगा। इसके लिए 30 जून 2026 की समय-सीमा तय की गई है। अगर इस तारीख तक किसी भी विद्यार्थी की यह विशेष डिजिटल आईडी नहीं बनती है, तो वह आगामी बोर्ड परीक्षा के लिए अपना रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) नहीं करा पाएगा, जिससे उसका साल बर्बाद होने का खतरा है।

ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए जरूरी होंगे ये दो कोड

बिहार बोर्ड की नई गाइडलाइन के अनुसार, आगामी सभी परीक्षाओं के रजिस्ट्रेशन, लिस्टिंग और परीक्षा फॉर्म भरने की प्रक्रिया के दौरान स्कूलों को दो चीजें अनिवार्य रूप से ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज करनी होंगी। पहला विद्यालय का यू-डाइस प्लस (U-DISE+) कोड और दूसरा संबंधित छात्र की अपार आईडी। इन दोनों के बिना ऑनलाइन पोर्टल आगे की प्रक्रिया को स्वीकार नहीं करेगा, जिससे छात्र परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित रह जाएंगे।

डीईओ का सख्त अल्टीमेटम, अभिभावकों से भी सहयोग की अपील

बोर्ड के इस कड़े रुख के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) राघवेंद्र प्रताप सिंह ने तुरंत एक्शन लेते हुए जिले के सभी स्कूलों के प्रिंसिपलों और ब्लॉक एजुकेशन अफसरों (बीईओ) को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही शिक्षा विभाग ने माता-पिता और अभिभावकों से भी अपील की है कि वे समय रहते अपने बच्चों का अपार आईडी कार्ड हर हाल में बनवा लें ताकि ऐन वक्त पर कोई परेशानी न हो।

लक्ष्य हासिल करने की डेडलाइन 30 जून, स्कूलों की लापरवाही से बढ़ी चिंता

समिति ने सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे तुरंत स्कूलों के हेडमास्टरों के साथ बैठक कर काम की समीक्षा करें। एमआईएस (MIS) के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। जिले के 3215 स्कूलों में इस आईडी को बनाने की रफ्तार कछुआ गति से चल रही है।

क्या है अपार आईडी और छात्रों को इससे क्या होगा फायदा?

यह व्यवस्था केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ (One Nation, One Student ID) का एक हिस्सा है।

शैक्षणिक दस्तावेज होंगे पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी

समग्र शिक्षा अभियान के डीपीओ जय कुमार ने इस व्यवस्था की खासियत बताते हुए कहा कि अपार आईडी लागू होने से छात्रों का पूरा एजुकेशनल डेटा डिजिटल रूप से पूरी तरह सेफ हो जाएगा। इससे भविष्य में कहीं भी एडमिशन लेने या सरकारी नौकरी के समय कागजातों और डॉक्यूमेंट्स के वेरिफिकेशन (सत्यापन) की झंझट खत्म हो जाएगी और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह रोक लगेगी।