अब जंगल में होगी हाईटेक निगरानी, बिहार के VTR में बाघ-तेंदुए पर नजर रखेगी ये तकनीक

Rani Thakur

बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) में वन्यजीवों की सुरक्षा और निगरानी के लिए प्रशासन ने विशेष तैयारी की है। इस कड़ी में यहां अत्याधुनिक AI-आधारित स्मार्ट कैमरे लगाए जाएंगे

सांकेतिक तस्वीर

न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क : बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में वन्यजीवों की सुरक्षा और उनकी मॉनीटरिंग व्यवस्था में एक बड़ा डिजिटल बदलाव होने जा रहा है। इस कड़ी में अब जंगल के खूंखार और दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा का जिम्मा 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) तकनीक के हाथों में सौंपा जाएगा। वीटीआर प्रशासन ने इंसानों और जानवरों के बीच होने वाले हिंसक टकराव को रोकने तथा शिकारियों पर नकेल कसने के लिए जंगल से सटे बाहरी और संवेदनशील इलाकों में 30 अत्याधुनिक स्मार्ट सीसीटीवी कैमरे लगाने की तैयारी की है।  

'तीसरी आंख' और अलर्ट सिस्टम

मिली जानकारी के अनुसार यह कोई सामान्य सीसीटीवी कैमरा नहीं, बल्कि पूरी तरह एआई बेस्ड ऑटोमैटिक सिस्टम है। जैसे ही कोई बाघ, तेंदुआ या भालू जंगल की सीमा लांघकर आबादी या बाहरी रास्तों की तरफ बढ़ेगा, ये स्मार्ट कैमरे पलक झपकते ही उसकी पहचान करने में सक्षण होंगे। जानवर की मौजूदगी डिटेक्ट होते ही वन विभाग के कंट्रोल रूम और संबंधित रेंज अधिकारियों के मोबाइल पर तुरंत 'ऑटोमैटिक अलर्ट' पहुंच जाएगा। इससे वन विभाग की क्विक रिस्पांस कर मौके पर पहुंच जाएगी। 

सुरक्षित बनेगा 'टाइगर कॉरिडोर'

इस हाईटेक सर्विलांस सिस्टम के लागू होने से वन विभाग को कई मोर्चों पर बड़ी कामयाबी मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।  

व्यवहार का अध्ययन: वन्यजीवों के मूवमेंट और उनके प्राकृतिक व्यवहार का सही डेटा मिलने से रिसर्च में मदद मिलेगी। 

क्राइम कंट्रोल: जंगल में होने वाली अवैध कटाई, शिकार, तस्करी या फिर किसी संदिग्ध मानवीय गतिविधियों की वीडियो रिकॉर्डिंग अधिकारियों तक पहुंच सकेगी।

कॉरिडोर की पहचान: इन कैमरों से उन रास्तों का सही नक्शा तैयार हो सकेगा, जिनका इस्तेमाल बाघ रिजर्व क्षेत्र से बाहर आने-जाने के लिए किया जाता है। इससे नए 'टाइगर कॉरिडोर' को विकसित करने में मदद मिलेगी।