शिक्षकों को नहीं काटना होगा दफ्तरों का चक्कर! बिहार में टीचर ट्रांसफर की नई गाइडलाइन जारी, ये 7 श्रेणियां तय

Rani Thakur

बिहार में शिक्षकों को ट्रांसफर के लिए जिला या राज्य मुख्यालय का चक्कर नहीं लगाना होगा। वे निर्धारित पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर अपने स्थानांतरण का दावा पेश कर सकेंगे।<br/>

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न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क : पूरे बिहार में शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन होगी। शिक्षा विभाग की तरफ से बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नियमावली 2026 लागू कर दी गई है। इसके तहत शिक्षकों को ट्रांसफर के लिए जिला या राज्य मुख्यालय का चक्कर नहीं लगाना होगा। वे निर्धारित पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर अपने स्थानांतरण का दावा पेश कर सकेंगे।

प्रत्येक श्रेणी वरीयता के आधार भी निर्धारित 

जानकारी के अनुसार नई नियमावली में ट्रांसफर की सात श्रेणियां तय की गई हैं तथा प्रत्येक श्रेणी वरीयता के आधार भी निर्धारित किए गए हैं। नई व्यवस्था में गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षकों को प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा दिव्यांगता, पति-पत्नी पदस्थापन, विधवा, तलाकशुदा अथवा एकल अभिभावक, पारस्परिक स्थानांतरण, समायोजन/समानुपातीकरण तथा सामान्य स्थानांतरण के लिए भी अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं।  

किन्हें मिलेगी प्राथमिकता 

शिक्षा विभाग की अधिसूचना के मुताबिक स्थानांतरण के कारणों के लिए अंक आधारित व्यवस्था लागू की गई है। वरीयता सूची में कैंसर, ओपन हार्ट सर्जरी, अट्रियल सेप्टल डिफेक्ट का उपचार, अंग प्रत्यारोपण, एकल किडनी या किडनी प्रत्यारोपण, डायलिसिस, ब्रेन ट्यूमर, प्रमुख न्यूरो सर्जरी, बोन टीबी, गंभीर टीबी और पक्षाघात जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित शिक्षकों को पहली प्राथमिकता मिलेगी। 

इन आवेदनों पर होगा विचार 

नियम के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में किसी शिक्षक का स्थानांतरण पांच वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद ही किया जाएगा। हालांकि गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, पति-पत्नी पदस्थापन जैसी विशेष परिस्थितियों में न्यूनतम सेवा अवधि पूरी होने से पहले भी आवेदन पर विचार संभव है। वहीं, पारस्परिक स्थानांतरण के लिए दोनों शिक्षकों की संयुक्त सहमति जरूरी होगी। हालांकि दोनों का समान संवर्ग और श्रेणी का होना जरूरी है। जबकि विषयवार पदस्थापन वाले मामलों में दोनों का विषय भी समान होना जरूरी है।