रेल यात्रियों के लिए गुड न्यूज! बिहार के इस रूट में डबल लाइन बनकर तैयार, इस दिन से शुरू होने जा रही सेवा

Rani Thakur

पश्चिम चंपारण जिले में बेतिया-मझौलिया रेलखंड का दोहरीकरण कार्य पूरा कर लिया गया है। इसका अंतिम निरीक्षण कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) द्वारा 3 जुलाई को होगा।

सांकेतिक तस्वीर

न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क : पश्चिम चंपारण के लोगों और इस रूट पर सफर करने वाले लाखों रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। सुगौली-वाल्मीकिनगर रेलखंड के दोहरीकरण प्रोजेक्ट के तहत बेतिया-मझौलिया सेक्शन का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। अब इस नए ट्रैक पर ट्रेनों के परिचालन को अंतिम मंजूरी दिलाने की तैयारी जारी है। आगामी 3 जुलाई को कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी इस पूरे रेलखंड का अंतिम निरीक्षण करेंगे, जिसके बाद इस रूट पर नियमित ट्रेन सेवाएं शुरू हो सकेंगी। 

रेलवे ने जारी किया लेटर

मिली जानकारी के अनुसार पूर्व मध्य रेलवे (निर्माण संगठन) की ओर से समस्तीपुर मंडल को आधिकारिक पत्र भेजकर निरीक्षण की तिथि की पुष्टि कर दी गई है। कोलकाता स्थित सीआरएस कार्यालय ने 3 जुलाई की तारीख तय की है। इस घोषणा के साथ ही समस्तीपुर मंडल को तय समय सीमा के भीतर सभी आवश्यक तकनीकी और सुरक्षा संबंधी तैयारियां पूरी करने के निर्देश जारी किया गया है। 

प्री-ट्रायल के बाद आगे का प्रोसेस 

3 जुलाई को होने वाले मुख्य सुरक्षा निरीक्षण से पहले रेलवे के विभिन्न विभागों के आला अधिकारियों की एक संयुक्त टीम बेतिया-मझौलिया सेक्शन जायजा लेगी। इस टीम में निर्माण संगठन, इंजीनियरिंग, परिचालन, विद्युत, और सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग के एक्सपर्ट्स भी हिस्सा लेंगे। यह टीम ट्रैक की गुणवत्ता, ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन, रेलवे फाटक, स्टेशन यार्ड और सिग्नलिंग व्यवस्था को देखेगी। अगर प्री-निरीक्षण में कोई तकनीकी कमी पाई जाती है, तो उसे तुरंत दुरुस्त किया जाएगा।

दोहरीकरण से चंपारण को बड़े फायदे

मुजफ्फरपुर-सुगौली-वाल्मीकिनगर रूट के इस हिस्से का डबल होना उत्तर बिहार के रेल नेटवर्क के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित होगा। इससे ये फायदे मिलेंगे:

50 लाख आबादी को मिलेगा लाभ

इस महत्वपूर्ण रेल खंड के दोहरीकरण का सीधा और परोक्ष लाभ करीब 40 से 50 लाख की आबादी को मिलेगा। इसके अलावा, चूंकि यह लाइन गोरखपुर के रास्ते देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई को जोड़ती है, इसलिए इसका व्यापक लाभ पूरे पश्चिम चंपारण (बगहा, नरकटियागंज), पूर्वी चंपारण के कुछ हिस्सों और पड़ोसी देश नेपाल के सीमावर्ती तराई क्षेत्रों (जैसे वीरगंज और रक्सौल रूट के यात्री) के लोगों को भी मिलेगा।