Z+ सुरक्षा खत्म होने से बौखलाई राबड़ी देवी, सरकारी सिक्योरिटी लेने से किया इनकार

Rani Thakur

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने अपनी सरकारी सुरक्षा को लौटा दिया है। उन्होंने यह सुरक्षा लेने से इनकार किया है।

राबड़ी देवी ने लौटाई सरकारी सुरक्षा

न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
रोहित / पटना :
बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने अपनी सरकारी सुरक्षा को लौटा दिया है। उन्होंने यह सुरक्षा लेने से इनकार किया है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सरकार द्वारा सुरक्षा में कटौती किए जाने के बाद बड़ा फैसला लेते हुए अपनी सरकारी सुरक्षा वापस कर दी।

राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप 

इस संबंध में राजद का आरोप है कि सुरक्षा में कटौती राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई है। जिससे नाराज होकर राबड़ी देवी ने सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई सुरक्षा वापस लौटा दी। पार्टी नेताओं के अनुसार अब राबड़ी देवी बिना सरकारी सुरक्षा के आवागमन करेंगी।

जेड प्लस की जगह एसएसजी सुरक्षा

बता दें कि राज्य सरकार ने शुक्रवार को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को अब तक प्राप्त जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा को समाप्त कर दिया है। इसके स्थान पर विशेष सुरक्षा दल (एसएसजी) की सुरक्षा व्यवस्था दी गई है। 

नए आदेश में क्या है खास 

नए आदेश के अनुसार, लालू प्रसाद को बीसैप (बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस) से दो से आठ हाउस गार्ड, पटना जिला बल से दो अंगरक्षक, बुलेटप्रूफ वाहन, पायलट और एस्कार्ट की सुविधा मिलेगी। वहीं, राबड़ी देवी को भी बीसैप से दो से आठ हाउस गार्ड, सादे लिबास में तीन महिला अंगरक्षक, तीन वर्दीधारी अंगरक्षक, बुलेटप्रूफ वाहन, पायलट और एस्कार्ट उपलब्ध कराया जाएगा।

गृह विभाग का आदेश 

पुलिस मुख्यालय में गुरुवार को राज्य सुरक्षा समिति की बैठक में हुए सुरक्षा बदलाव के निर्णय के बाद गृह विभाग की विशेष शाखा ने यह आदेश जारी किया है।

तेजस्वी, मीसा और राजश्री की सुरक्षा में बदलाव नहीं

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव की सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्हें पहले की तरह वाई प्लस श्रेणी (एस्कार्ट वाहन सहित) सुरक्षा मिलती रहेगी। वहीं, लालू प्रसाद के बड़े बेटे एवं पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव की सुरक्षा में सबसे अधिक कटौती की गई है। उन्हें अब तक वाई श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी, लेकिन नए आदेश में यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। अब उन्हें केवल एक अंगरक्षक की सुविधा मिलेगी।