यूपी से बंगाल सीधे कनेक्ट होगा बिहार, जानें इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का काम कब तक होगा पूरा और कब से दौड़ेंगी गाड़ियां

Anshuman Parashar

यूपी-बिहार से बंगाल को जोड़ने वाले 610 किमी लंबे वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे को हरी झंडी मिल गई है। ₹35,000 करोड़ का यह प्रोजेक्ट मार्च 2028 तक पूरा होगा, जिससे 14 घंटे का सफर मात्र 6 घंटे का रह जाएगा

न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क : बिहार के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को आधुनिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी से शुरू होकर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता तक जाने वाला 610 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पूर्वी भारत की तस्वीर बदलने के लिए तैयार है। इस बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना का सबसे शानदार और सीधा फायदा बिहार को मिलने जा रहा है। यह हाई-स्पीड कॉरिडोर न केवल सफर के समय को आधा कर देगा, बल्कि राज्य के नौ प्रमुख जिलों को तीन पड़ोसी राज्यों के साथ एक मजबूत कनेक्टिविटी नेटवर्क में पिरो देगा।

आर्थिक तरक्की का नया इंजन: निवेश और नौकरियों की बौछार

यह ₹35,000 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट सिर्फ एक हाईवे नहीं है, बल्कि बिहार के विकास का एक नया आर्थिक गलियारा (इकोनॉमिक कॉरिडोर) है। सड़क के रूट पर आने वाले क्षेत्रों में अभूतपूर्व व्यावसायिक विकास देखने को मिलेगा:

समय की भारी बचत: 14 घंटे का सफर अब सिर्फ 6 घंटे में

इस शानदार सड़क के चालू हो जाने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यात्रा के समय में आएगा। वर्तमान में वाराणसी से कोलकाता के बीच की दूरी तय करने में वाहनों को करीब 12 से 14 घंटे का लंबा समय लग जाता है। लेकिन इस आधुनिक एक्सप्रेसवे के जरिए यह सफर घटकर मात्र 6 घंटे का रह जाएगा। इससे माल ढुलाई की रफ्तार दोगुनी हो जाएगी, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी और व्यापारियों के साथ-साथ आम जनता का समय और पैसा दोनों बचेगा।

यूपी से बंगाल तक का रूट: बिहार के इन जिलों की खुलेगी किस्मत

यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के वाराणसी रिंग रोड स्थित बरहौली गांव से अपनी यात्रा शुरू करेगा और इसके बाद अलग-अलग राज्यों से गुजरेगा:

पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य

इस प्रोजेक्ट की रफ्तार में आ रही प्रशासनिक अड़चनें अब पूरी तरह दूर हो चुकी हैं। झारखंड और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में अटकी पर्यावरण मंजूरियां आखिरकार मिल गई हैं।

वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना में खास इको-फ्रेंडली डिजाइन अपनाए गए हैं, ताकि हाथियों और बाघों जैसे जानवरों के प्राकृतिक आवागमन में कोई बाधा न आए। सरकार की पूरी तैयारी है कि पर्यावरण संतुलन को बनाए रखते हुए मार्च 2028 तक इस विश्वस्तरीय एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए।