मध्यप्रदेश में ही रहूंगा, दिल्ली क्यों जाऊं : नाथ पूर्व मुख्यमंत्री व छिंदवाड़ा से विधायक कमलनाथ ने सोमवार
भोपाल | पूर्व मुख्यमंत्री व छिंदवाड़ा से विधायक कमलनाथ ने सोमवार को विधानसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली, उन्हें विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने शपथ दिलाई। कमलनाथ नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में छिंदवाड़ा से विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे। इस दौरान मीडिया ने पूछा कि क्या चुनाव के बाद क्या आप दिल्ली जाएंगे। इस पर नाथ ने कहा- मैं मप्र में ही रहूंगा, दिल्ली क्यों जाऊं? वहीं, विस चुनाव में हार के बाद आलाकमान की नाराजगी और अध्यक्ष पद से इस्तीफा लिए जाने के सवाल पर नाथ ने कहा- ‘यह आप उनसे ही पूछिएगा।’ हालांकि, इंचार्ज जनरल सेकेट्ररी भंवर जितेंद्र सिंह ने कहा कि नाथ ने इस्तीफा चुनाव परिणाम आने के अगले दिन ही दे दिया था। शीर्ष नेतृत्व ने तय किया था नया अध्यक्ष बनने तक नाथ इस पद पर बने रहेंगे। अयोध्या में चप्पे-चप्पे पर छावनियां हैं। हर गली और मोड़ पर कहीं गढ़ी, कहीं किला और कहीं कोट की ओर जाने वाले रास्ते दिखाई देंगे। अखाड़े तो सबने सुने ही हैं। छावनियों के नाम देखिए- मणिरामदास की छावनी, तपसी जी की छावनी, नरसिंह दास की छावनी और यहां तक कि गोस्वामी तुलसीदास की छावनी! खास बात यह है कि हर छावनी में आज केवल प्रभु श्रीराम विविध रूपों में दर्शनीय हैं। हनुमान गढ़ी तो जगप्रसिद्ध ही है। सरयू के किनारे ऊंचाई पर लक्ष्मण किला शान से खड़ा है और रामकोट के भीतर तो सारे ही प्रमुख तीर्थ सुरक्षित हैं। यह धर्म की नगरी है तो यहां ये सैन्य तैयारियों जैसे नामकरण किस अतीत की ओर संकेत करते हैं? आइए आज इसी जवाब की खोजबीन की जाए कि अयोध्या में यह चल क्या रहा था? बड़ी छावनी के नाम से सर्वाधिक प्रतिष्ठित छावनी है बाबा रघुनाथदास की छावनी। दिल्ली के लाल किले जैसे लाल पत्थरों की 25 फुट ऊंची किलेबंदी का विशाल प्रवेश द्वार भी किसी प्रभावशाली सामंत के भीतर होने का ऐलान करता है। यह कान्यकुब्जों की शक्तिपीठ है, जिसके वर्तमान पीठाचार्य हैं- श्रीजगदीशदास जी महाराज। उनका मानना है कि कई सदियों तक अयोध्या विधर्मियों के निशाने पर रही। अयोध्या में चप्पे-चप्पे पर छावनियां हैं। हर गली और मोड़ पर कहीं गढ़ी, कहीं किला और कहीं कोट की ओर जाने वाले रास्ते दिखाई देंगे। अखाड़े तो सबने सुने ही हैं। छावनियों के नाम देखिए- मणिरामदास की छावनी, तपसी जी की छावनी, नरसिंह दास की छावनी और यहां तक कि गोस्वामी तुलसीदास की छावनी! खास बात यह है कि हर छावनी में आज केवल प्रभु श्रीराम विविध रूपों में दर्शनीय हैं। हनुमान गढ़ी तो जगप्रसिद्ध ही है। सरयू के किनारे ऊंचाई पर लक्ष्मण किला शान से खड़ा है और रामकोट के भीतर तो सारे ही प्रमुख तीर्थ सुरक्षित हैं। यह धर्म की नगरी है तो यहां ये सैन्य तैयारियों जैसे नामकरण किस अतीत की ओर संकेत करते हैं? आइए आज इसी जवाब की खोजबीन की जाए कि अयोध्या में यह चल क्या रहा था? बड़ी छावनी के नाम से सर्वाधिक प्रतिष्ठित छावनी है बाबा रघुनाथदास की छावनी। दिल्ली के लाल किले जैसे लाल पत्थरों की 25 फुट ऊंची किलेबंदी का विशाल प्रवेश द्वार भी किसी प्रभावशाली सामंत के भीतर होने का ऐलान करता है। यह कान्यकुब्जों की शक्तिपीठ है, जिसके वर्तमान पीठाचार्य हैं- श्रीजगदीशदास जी महाराज। उनका मानना है कि कई सदियों तक अयोध्या विधर्मियों के निशाने पर रही।