TMC के 127 पार्षदों ने दिया इस्तीफा, 181 FIR दर्ज... चुनावी नतीजों के बाद तृणमूल में मची भगदड़ 

Ark Sahuliyar

न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क:
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद राज्य की राजनीति तेजी से करवट लेती नजर आ रही है. सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. एक ओर पार्टी नेताओं पर लगातार कानूनी कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी तरफ कई नेता और जनप्रतिनिधि पार्टी छोड़ते दिखाई दे रहे हैं. इन घटनाओं ने बंगाल की राजनीतिक फिजा को पूरी तरह बदल दिया है. राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा TMC के अंदर बढ़ते असंतोष और टूट की हो रही है. पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों के बीच सार्वजनिक बयानबाजी ने यह संकेत दिया है कि संगठन के भीतर सबकुछ सामान्य नहीं है.

काकोली घोष और कल्याण बनर्जी विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें
TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पहले ही पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अपनी ही पार्टी के लोकसभा चीफ व्हीप कल्याण बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. काकोली घोष ने आरोप लगाया कि संअसद परिसर में कई मौकों पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया. हालांकि, कल्याण बनर्जी ने इन आरोपों को निराधार बताया है. उनका कहना है कि यदि सांसद को शिकायत थी तो उन्होंने पहले इसकी जानकारी क्यों नहीं दी. उन्होंने यह भी दावा किया कि नारदा स्टिंग मामले में काकोली घोष के खिलाफ जांच लंबित है और उसी दबाव के चलते ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं.यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पार्टी पहले से ही कई राजनीतिक और कानूनी संकटों से घिरी हुई है.

इस्तीफों और दलबदल से बढ़ी चिंता
पार्टी प्रवक्ता शांतनु सेन ने भी अपने पदों से इस्तीफा देते हुए संगठन में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि विभिन्न घोटालों और विवादों के बाद उनका अंतर्मन अब ऐसे माहौल का समर्थन नहीं कर सकता. इसी बीच, राज्य के कई स्थानीय निकायों से बड़ी संख्या में पार्षदों और नेताओं के इस्तीफअ  सामने आए हैं. बताया जा रहा है कि 15 नगरपालिकाओं, नगर निगमों और पंचायतों से करीब 127 जनप्रतिनिधियों ने अपने पद छोड़े हैं. BJP सांसद सौमित्र खान ने दावा किया है कि TMC के कई सांसद और विधायक भाजपा के संपर्क में हैं. उनके अनुसार, यदि पार्टी नेतृत्व से मंजूरी मिलती है तो कई बड़े चेहरे जल्द पाला बदल सकते हैं.

लगातार कार्रवाई और गिरफ्तारियों से बढ़ा दबाव
राज्य के अलग-अलग जिलों में TMC नेताओं पर कार्रवाई तेज हो गई है. कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई हैं, जबकि कुछ को गिरफ्तार भी किया गया है. विभिन्न मामलों में नकदी, सोना, हथियार और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद होने के दावे किए जा रहे हैं. कूचबिहार, बशीरहाट, हुगली, हावड़ा और उत्तर 24 परगना समेत कई इलाकों में पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है.कुछ मामलों में राजनीतिक हिंसा, अवैध संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं.

क्या TMC अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है?
मौजूदा हालात TMC के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं. पार्टी के कई विधायक और नेता विपक्षी नेताओं की बैठकों में दिखाई दे रहे हैं, जिससे अटकलों का दौर तेज हो गया है. हालांकि, TMC नेतृत्व लगातार यह दावा कर रहा है कि पार्टी मजबूत है और विरोधी दल राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर BJPइन घटनाओं को राज्य में बदलते राजनीतिक समीकरण का संकेत बता रही है. बंगाल की राजनीति फिलहाल आरोप-प्रत्यारोप, दलबदल और कार्रवाई के दौर से गुजर रही है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि TMC इस संकट से कैसे बाहर निकलती है और क्या राज्य की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलता है.

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