पूरे देश में एक समान होगी एम्बुलेंस सुविधा, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने किया राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा अनावरण

Pramod Kumar,News11 Bharat,

देशभर में आपातकालीन चिकित्सा परिवहन को मानकीकृत करने के लिए राष्ट्रीय फ्रेमवर्क तैयार

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: केन्द्र की मोदी सरकार ने पूरे देश के लिए एक समान एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध कराने का ऐलान किया है. भारत की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा. सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा (NAS), 2026 के परिचालन का दिशानिर्देश जारी किया है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा विकसित ये दिशानिर्देश पहली बार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एम्बुलेंस सेवाओं की योजना बनाने, संचालन करने और निगरानी करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय फ्रेमवर्क प्रदान करते हैं, जिसका उद्देश्य प्रत्येक नागरिक के लिए समय पर, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण आपातकालीन चिकित्सा परिवहन सुनिश्चित करना है.

आपातकालीन चिकित्सा देखभाल की प्रभावी बुनियाद एम्बुलेंस सेवाएं हैं, जो चिकित्सा आपात स्थितियों के दौरान रोगियों और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के बीच संपर्क का पहला बिंदु होती हैं. अस्पताल पहुंचने से पहले देखभाल प्रदान करने, रोगियों की स्थिति स्थिर करने और उन्हें उचित स्वास्थ्य सुविधाओं तक शीघ्र पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानते हुए, ये दिशानिर्देश एकसमान परिचालन मानक स्थापित करने का प्रयास है जो पूरे देश में आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करेंगे.

यह फ्रेमवर्क एम्बुलेंस सेवा डिलीवरी के हर पहलू को व्यापक रूप से संबोधित करता है, जिसमें एम्बुलेंस का वर्गीकरण, जनसंख्या आधारित बेड़ा तैनाती, मानव संसाधन मानदंड, उपकरण विनिर्देश, दवाएं और उपभोग्य वस्तुएं, आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियनों (EMTs) के लिए योग्यता आधारित प्रशिक्षण, संक्रमण रोकथाम और कंट्रोल प्रेक्टिसेज, वाहन रखरखाव प्रोटोकॉल, गुणवत्ता आश्वासन, प्रदर्शन निगरानी और शिकायत निवारण तंत्र शामिल हैं. दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है कि सभी एम्बुलेंस AIS-125 मानकों के अनुरूप होनी चाहिए, जिससे आपातकालीन चिकित्सा परिवहन में एकरूपता, सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके.

समन्वय और प्रतिक्रिया दक्षता बढ़ाने के लिए, दिशानिर्देशों में जीपीएस-सक्षम एम्बुलेंस ट्रैकिंग, डिजिटल कॉल प्रबंधन प्रणाली, संरचित ट्राइएज प्रोटोकॉल, इंटेलिजेंट डिस्पैच तंत्र और रियल टाइम निगरानी डैशबोर्ड द्वारा समर्थित एकीकृत कमांड और डिस्पैच केंद्रों (ICDCs) की स्थापना की पहल की गई है. इनमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आपातकालीन देखभाल की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एम्बुलेंस सेवाओं को एकीकृत आपातकालीन प्रतिक्रिया नंबर '112' के साथ क्रमिक रूप से एकीकृत करने की भी परिकल्पना की गई है.

इन दिशा-निर्देशों में आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना के लिए उन्नत डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने को प्रोत्साहित किया गया है. भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) पर आधारित स्वास्थ्य सुविधाओं, रेफरल केंद्रों, एम्बुलेंस स्टेशनों, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों, उच्च जोखिम वाले स्थानों, बिस्तरों की उपलब्धता और गहन देखभाल की तैयारियों की मैपिंग के माध्यम से, सहायता दल निकटतम और सबसे उपयुक्त स्वास्थ्य सुविधा की पहचान कर सकेंगे, जिससे प्रतिक्रिया समय कम होगा और रोगियों के उपचार में सुधार होगा.

डेटा-आधारित योजना पर जोर देते हुए, यह फ्रेमवर्क आपातकालीन कॉल के रुझान, रेफरल पैटर्न, यातायात सघनता, दुर्घटना के प्रमुख क्षेत्रों, भौगोलिक बाधाओं और जनसंख्या वितरण का विश्लेषण करके साक्ष्य-आधारित एम्बुलेंस तैनाती की संस्तुति करता है. इस तरह की वैज्ञानिक तैनाती से संसाधनों का अधिकतम उपयोग होने, सेवाओं की पहुंच में सुधार होने और विशेष रूप से ग्रामीण, दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में समान आपातकालीन चिकित्सा कवरेज सुनिश्चित होने की उम्मीद है.

राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवाओं (NAS) पर परिचालन दिशानिर्देश, 2026, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना के आधुनिकीकरण और अस्पताल पहुंचने से पहले देखभाल सेवाओं को मजबूत करने के लिए सरकार के चल रहे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.

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