न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क: हर साल पर्यावरण को नुकसान करने वाली पराली को वरदान बनाने की तैयारी चल रही है. जो पराली हर साल पर्यावरण का ढेरों नुकसान करती थी, उसे देश पर आए ऊर्जा संकट से लड़ने का हथियार बनाया जाएगा. इससे न सिर्फ ऊर्जा संकट का समाधान हो सकेगा, बल्कि ऊर्जा पर आत्मनिर्भरता बढ़ेगी. पराली को लेकर चर्चा यह है कि इसका इस्तेमाल इथेनॉल के रूप में तो किया ही जाएगा, उसकी नई और ज्यादा उन्नत तकनीक 2G इथेनॉल के रूप में होगा. इसकी विशेषता यह है कि यह इथेनॉल अनाज या गन्ने के रस से नहीं, बल्कि खेतों में बचने वाले कृषि कचरे जिसे पराली के रूप में जाना जाता है, का इस्तेमाल किया जाएगा.
2G इथेनॉल के लिए जब पराली का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल होगा तो हर साल इसको जलाने और इससे होने वाली गंभीर पर्यावरणीय समस्या से भी छुटकारा मिलेगा।
बता दें कि इथेनॉल का भी स्तर है. पहले स्तर के इथेनॉल को 1G Ethanol कहते है, यह गन्ने के रस और अनाज से तैयार किया जाता है. 1G Ethanol के लिए गन्ने और पौधों का इस्तेमालकरने से खाद्यान्न संकट को लेकर सवाल उठते रहे हैं, मगर दूसरी पीढ़ी का यह इथेनॉल यानी 2G Ethanol कहते है कृषि अवशेषों से तैयार होगा. जैसे, पराली, गन्ने की खोई, मक्के के डंठल और बांस जैसे कृषि कचरे इसके लिए इस्तेमाल होंगे. इस तकनीक के कारण खाद्यान्न सुरक्षा पर कोई संकट भी नहीं आ पाएगा. इतना ही नहीं, जिस कचरे से किसानों को कुछ भी नहीं मिलता था, उससे उनको आय भी होने लगेगी.
अब सवाल उठता है कि 2G इथेनॉल का इस्तेमाल कहां-कहां हो सकता है. तो बता दें कि इसका उपयोग सिर्फ गाड़ियों में ईंधन तक ही सीमित नहीं होगा. इसका उपयोग Sustainable Aviation Fuel (SAF) बनाने में भी किया जा सकता है. यानी हवाई जहाज के ईंधन के रूप में भी इसका इस्तेमाल होगा. इस ईंधन के इस्तेमाल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि हवाई जहाजों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन कम हो सकेगा.
इसके अन्य उपयोग मे पेंट, कॉस्मेटिक्स, दवाइयों और प्लास्टिक उद्योग में भी हो सकता है. जानकारी के अनुसार, इससे बायोप्लास्टिक भी बनाया जा सकता है. चूंकि इसे आसानी से नष्ट किया जा सकता है, इसलिए इससे पर्यावरण को नुकसान की सम्भावना कम है.