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रांची/डेस्क: कांग्रेस द्वारा आहूत बहुप्रतीक्षित इंडी गठबंधन की बैठक में देशभर की 23 पार्टियों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए. इंडी गठबंधन की बैठकों से आमतौर पर गायब रहने वाली तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री सोमवार को हुई बैठक में शामिल रहीं. हालांकि बैठक से DMK, AAP और CPM जैसी प्रमुख पार्टियों ने दूरी बनाए रखी. हालांकि बैठक शुरू होने से पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने डीएमके सांसद कनिमोझी को फोन घुमाया, लेकिन कांग्रेस से चल रहे मतभेद के कारण कांग्रेस नेत्री ने बैठक में आने से इनकार कर दिया.
दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में इंडी गठबंधन की बैठक का उद्घाटन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने किया. उन्होंने अपने भाषण में केन्द्र सरकार पर कटघरे में खड़ा करते हुए महंगाई, कथित गिरती अर्थव्यवस्था, विदेश नीति, बेरोजगारी और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मुद्दे पर न सिर्फ घेरा बल्कि इन मुद्दों पर आन्दोलन छेड़ने की रणनीति बनाने का आह्वान किया. इसके साथ ही खड़गे ने गठबंधन सहयोगी दलों से मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया.
सोनिया गांधी समेत विपक्ष के कई नेता बैठक में हुए शामिल
इंडी गठबंधन की बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस संसदीय समिति की प्रमुख सोनिया गांधी, TMC नेता ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की सुप्रिया सुले, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती शामिल रहे.
इंडी गठबंधन की बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे का सम्बोधन
मैं INDIA समूह के नेताओं की इस बैठक में आप सभी का स्वागत करता हूं. यह समूह लगभग ठीक तीन साल पहले अस्तित्व में आया था. मैं ज्यादा नहीं बोलना चाहता, क्योंकि हमारे सामने मौजूद मुद्दे आप सभी अच्छी तरह जानते हैं.हमने 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में अपनी एकजुटता और एकता को बहुत निर्णायक तरीके से दिखाया, जब हम सबने मजबूती से एकजुट होकर डिलिमिटेशन पर मोदी सरकार के दुर्भावनापूर्ण बिलों को परास्त किया.
अब हमें उसी भावना को और मजबूत करना है और आगे बढ़ाना है, ताकि मोदी सरकार के कुशासन के कारण देश के सामने खड़ी कई राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और विदेश नीति से जुड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सके. SIR के कारण हमारे करोड़ों लोगों से उनका मताधिकार छीना जा रहा है. संविधान पर हमला लगातार जारी है. जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने और डराने-धमकाने के औजार के रूप में लगातार किया जा रहा है. गैर-भाजपा सरकारों के साथ भेदभाव किया जा रहा है.जरूरी वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और आर्थिक माहौल बेहद नकारात्मक है. नई नौकरियां पैदा करने के लिए जिस रफ्तार से नए निवेश आने चाहिए, वे बिल्कुल उस रफ्तार से नहीं आ रहे हैं. कई क्षेत्रों में निजी एकाधिकार बढ़ रहा है और MSMEs का भविष्य गंभीर संकट में है. परीक्षा प्रणाली के पूर्ण कुप्रबंधन के कारण हमारे लाखों युवाओं की आशाओं और आकांक्षाओं के साथ विश्वासघात किया जा रहा है. समाज के कमजोर वर्गों पर अत्याचार, खासकर भाजपा शासित राज्यों में, लगातार जारी हैं. हमारी विदेश नीति के साथ पूरी तरह से समझौता किया गया है और उन पारंपरिक मूल्यों को कायम नहीं रखा गया है, जिनकी भारत लंबे समय से पुरजोर समर्थन करता रहा है.
मैं प्रत्येक दल के नेता से अनुरोध करूंगा कि वे कुछ शब्द कहें, जिसके बाद हम आगे उठाए जाने वाले कदमों पर सामूहिक रूप से चर्चा कर सकते हैं.
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