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रांची/डेस्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के शांति प्रस्ताव पर हस्ताक्षर हो गये. दोनों ने डिजिटल सिग्नेचर करके शांति प्रस्ताव पर आखिरकार मुहर लगा दी है. इसके साथ दोनों देशों के बीच स्विटजरलैंड में 19 जून को हस्ताक्षर की औपचारिकता की आवश्यकता खत्म हो गयी. शांति प्रस्ताव पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद अब दुनिया राहत की सांस ले रही है, क्योंकि अब होर्मुज स्ट्रेट के खुलने और व्यापारिक जहाजों के आवागमन का रास्ता साफ हो गया है.
दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के डिजिटल हस्ताक्षर के बाद यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है. इससे पहले रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गलिबाफ ने डिजिटल हस्ताक्षर किए थे. व्हाइट हाउस के द्वारा बताया गया कि, राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय पैलेस में आयोजित रात्रिभोज के दौरान आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए. व्हाइट हाउस ने हस्ताक्षर समारोह का एक वीडियो भी जारी किया है. बता दें कि हर बार की भांति इस बार भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी पोस्ट करके इसकी पुष्टि भी कर दी है.
दोनों देशों की बीच किन शर्तों पर बनी सहमति
- 107 दिन की जंग के बाद दोनों देशों ने सीजफायर डील फाइनल की. इस समझौते के मसौदे में 14 पॉइंट हैं.
- लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्धविराम
- ईरानी तेल और ऊर्जा उत्पादों पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध खत्म
- विदेशों में फंसे $100-120 अरब डॉलर जारी होंगे
- अमेरिका और सहयोगी देश ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम $300 अरब की योजनाएं देंगे
- 30 दिनों में अमेरिका अपनी सेनाएं ईरान से वापस बुलाएगा
- अमेरिका ने वादा किया कि ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा
- 30 दिन में "ईरान की व्यवस्था" के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुलेगा
- ईरान दोबारा वादा करेगा कि परमाणु हथियार नहीं बनाएगा
- तुरंत होर्मुज जलमार्ग खोलना होगा, जहाजों की अबाध आवाजाही
- अमेरिका, इजरायल और पड़ोसी देशों पर सभी हमले बंद करने होंगे
- परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल खतरे का स्थायी समाधान
- हमास, हिजबुल्ला, हूतियों जैसे गुटों पर ईरान का नियंत्रण बातचीत की सफलता तय करेगा
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