जबलपुर में खतरनाक कफ सिरप के सेवन से मरने वाले बच्

कफ सिरप का जानलेवा जहर! FDC दवाओं पर चेतावनी न देने से गहराया संकट

जबलपुर। कफ सिरप में नुकसानदेह तत्व की अनदेखी लोगों को भारी पड़ रही है। डायएथिलीन ग्लायकाल केमिकल की पुष्टि के बाद बाजार में बिक रहे दूसरे कफ सिरप पर भी संदेह गहरा गया है। निशेषज्ञ कहते हैं कि बाजार में फिक्स डोज जनित कई सिरप मौजूद हैं।इसका प्रयोग काफी किया जाता है। इस तरह के दवा पर किसी तरह की चेतावनी नहीं होती है। जबकि साफ तौर पर कहा गया है कि फिक्स डोज वाले कुछ दवा चार साल से कम उम्र के बच्चे को नहीं देना है। निर्देश में यह भी कहा गया है कि दवा निर्माता कंपनी को इस तथ्य का प्रचार भी करना चाहिये। लेकिन स्थिति यह है कि दवा निर्माता कंपनी इस निदेश का पालन नहीं करती है।वही दवा लिखने वाले चिकित्सक भी इस तथ्य को नजरअंदाज करते हैं। मंत्रालय ने निर्देश में कहा है कि फिक्स डोज दवा के लेबल या प्रमोशन प्रारूप पर चेतावनी एफडीसी का उपयोग चार वर्ष या उससे कम उम्र के बच्चे नहीं करने संबंधी निर्देश देना आवश्यक है। इस बीच एक और बच्चे की जान जाने से मरने वालों की संख्या 17 हो गई है। छिदवाड़ा की नवीन की बेटी धानी डहेरिया की नागपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। मंगलवार को जबलपुर जिलाधिकारी राधवेंद्र सिंह के निर्देश पर राजस्व और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने कई दवा दुकानों का निरीक्षण किया। इस परीक्षण में किसी दुकान पर प्रतिबंधित कफ सिरप नहीं पाया गया। कुंडम, सिहोरा आदि जगहों पर दवा दुकानों की जांच की गई। जिलाधिकारी ने मेडिकल दुकान की सतत जाच और प्रतिबंधित दवा मिलने पर कड़ी कार्रवाई करने के निदेश दिये हैं। उधर, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने डा. प्रवीण सोनी की गिरफ्तारी का विरोध किया है। साथ ही कहा है कि चिकित्सक का काम दवा लिखना, डायग्नोसिस और मरीज की बीमरी ठीक हेने के लिए दवा लिखना ही उसका कर्तव्य है। मरीज को लाभ मिले यही उसका कर्तव्य है। सरकार द्वारा जारी निर्देश का दवा कंपनी पूरी तरह पालन करे।