नई शिक्षा नीति को लागू करने से मध्य प्रदेश के विश्

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा उंची शिक्षा में रोजगारी-संबंधित बदलाव अपनाए जा रहे हैं

भोपाल। मध्य प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में आने वाले समय में कई ऐसे बदलाव दिख सकते हैं जो अब तक राज्य के विश्वविद्यालयों में नहीं दिखाई दिए। सरकार एक तरफ नई शिक्षा नीति को जमीन पर उतारने में जुटी है तो दूसरी ओर ऐसे पाठ्यक्रम तैयार कर रही है जिन्हें सीधे रोजगार, संस्कृति और बदलती जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है।

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने स्वदेश न्यूज़ को विशेष इंटरव्यू दिया। उन्होंने कॉलेज में शिक्षकों की भर्ती से लेकर परीक्षा प्रणाली, रिसर्च, निजी कॉलेजों की जांच, भारतीय भाषाओं और मंदिर प्रबंधन जैसे कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। पेश हैं बातचीत के प्रमुख सवाल और उनके जवाब।

सवाल: नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव क्या माना जाए?

जवाब: इंदर सिंह परमार का कहना है कि यह बदलाव केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा व्यवस्था को भारत की जरूरतों और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ती है। उनका मानना है कि पहले की नीतियों में विदेशी मॉडल का प्रभाव अधिक था, जबकि नई नीति सीखने की क्षमता, गुणवत्ता आधारित शिक्षा और भारतीय दृष्टिकोण पर जोर देती है। सरकार का लक्ष्य केवल डिग्री देना नहीं बल्कि ऐसे विद्यार्थी तैयार करना है जो समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी समझें।