विद्या शर्मा/न्यूज11 भारत
जादूगोड़ा/डेस्क: भूमिज भाषा को डिजिटल प्लेटफार्म में पहचान दिलाने वाले अनिल सिंह मुण्डा( 55 वर्ष) बीती रात निधन हो गया.इधर उनके निधन के बाद जादूगोड़ा _ पोटका का भूमिज समाज मर्माहत है.इनके निधन पर आदिवासी भूमिज समाज के राष्ट्रीय महासचिव दिनेश सरदार ( जादूगोड़ा) ने शोक व्यक्त करते हुए समाज के लिए इसेअपूर्णनीय क्षति बताया. यहां बताते चले किअनिल सिंह मुंडा ( 55 वर्ष ) अचानक हृदय गति रुक जाने से रायरंगपुर अस्पताल में उनका इलाज के दौरान बीती रात आकस्मिक सीवीनिधन हो गया. वे आई टी सेक्टर में असम में कार्यरत थे व बीते 20 मई को अपने उड़ीसा के गुरूमाईसीनी के करलाबनी गांव दोपहर में नहाने के क्रम अचानक जमीन पर गिर पड़े जहाँ से उन्हें इलाज कराने रायरंगपुर जिला अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. उनके पैतृक गांव करलाबनी में अन्तिम संस्कार किया गया जिसमें झारखंड राज्य से राष्ट्रीय महासचिव दिनेश सरदार ने उनके गांव जाकर अनिल सिंह मुंडा के अन्तिम दर्शन कर श्रद्धासुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.
इस दौरान भूमिज-समाज के विद् दीरि झंडा मृतक अनिल मुंडा के शरीर परओढाकर सम्मानित किया गया. इस मौके कर सभी सामाजिक बुद्धिजीवियों दो मिनट मौन धारण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. मुखाग्नि अनिल सिंह मुंडा के बड़े पुत्र ने दिया. इनके निधन से मर्माहत जादूगोड़ा के राष्ट्रीय महासचिव दिनेश सरदार ने कहा कि समाज के प्रति उनके योगदान भुलाया नहीं जा सकता है. इनके निधन से मर्माहत भूमिज समाज के राष्ट्रीय महासचिव दिनेश सरदार ने कहा कि अनिल मुंडा भूमिज भाषा को यूनिकोड और साफ्टवेयर बनाकर उन्होंने भूमिज भाषा को डिजिटल युग पहुंचाने में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है.उन्होंने आगे कहा कि भूमिज-समाज के भूमिज भाषा को भारत सरकार के कापीराइट निबंधित करवाया व जिसके कारण झारखंड राज्य में द्वितीय राजभाषा को मान्यता प्राप्त संभव हो पाया व भूमिज लिपि ओल अनोल को कानूनी मान्यता एवं संरक्षण प्राप्त हो सका. उनके अतिम अंतिम संस्कार में भारतीय आदिवासी भूमिज समाज के पूर्व अध्यक्ष श्री पाईको सिंह, केन्द्रीय संगठन सचिव श्रीमती गीता मनी सिंह, सदस श्री महेन्द्र नाथ सिंह श्री गदाधर सिंह, रामचंद्र सिंह सरदार, टोटन सरदार ने हिस्सा लिया.
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