सरकार पर जमकर बरसें बाबूलाल मरांडी, कहा- 'बंद हो रहीं खदानें, बर्बाद हो रहा झारखंड, CM मस्त हैं'

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बाबूलाल मरांडी ने जमकर झारखंड सरकार को घेरा है. उन्होंने बताया की सारंडा के लोगों की हालत काफी दयनीय है. झारखंड में विकास थम गया है.

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रांची/डेस्क: 
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी पश्चिमी सिंहभूम के दौरे से वापस लौट आये हैं. आज 16 जुलाई को प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि सारंडा और वहां रह रहे पारंपरिक ग्रामीणों की स्थिति काफी दयनीय है. आज भी उनके जीवन में कोई बदलाव नहीं हुआ है. सारंडा की खदानों से सबसे ज्यादा आयरन निकाला जाता है, लेकिन  बुनियादी सुविधाओं के लिए वे लोग आज भी संघर्ष कर रहे हैं. उन्हें न तो स्वच्छ पानी मिल रहा है, न ही बिजली की व्यवस्था है और न तो इलाके के बच्चों के लिए कोई बढ़िया स्कूल. 

डीएमएफटी फंड में घोटाले का आरोप 

बाबूलाल मरांडी ने बताया कि वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री ने डीएमएफटी फंड बनाया था, जिसके तहत विभिन्न जिलों के विकास के लिए राशि उपलब्ध कराई गयी थी. इसी क्रम में केवल चाईबासा को 300 करोड़ रुपये का फंड दिया गया था और सभी जिलों के डीसी को इसका दायित्व सौंपा गया था. बाबूलाल मरांडी ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि डीएमएफटी फंड का दुरूपयोग हुआ है. फंड से सिर्फ निजी काम कराए गए, क्षेत्र में विकास का कोई काम नहीं हुआ है. 

झारखंड में बंद हो रहे खदान 

बाबूलाल मरांडी ने  कहा कि केवल सारंडा ही नहीं बल्कि सभी खनिज-बहुल जिला की यही हालत है. कोल्हान क्षेत्र में बेरोजगारी और पलायन की जबरदस्त समस्या है. चाइल्ड ट्रैफिकिंग भी बड़े पैमाने पर हो रहा है. वर्ष 2019 के बाद से देशभर के खनिज खदानों की नीलामी हुई. कुल 434 खदानों में से झारखंड में तीन ही खदानों की नीलामी हुई. जब खदानों की शुरुआत नहीं होगी तो रोजगार कहां से मिलेगा. अकेले कोल्हान क्षेत्र में ही दर्जन भर खदानें हैं जो खुलवाई जा सकती थी. सारंडा के जंगल से सटा हुआ क्षेत्र उड़ीसा में आता है उड़ीसा सरकार ने 45 खदानों की नीलामी करवाई. वहीं छत्तीसगढ़ ने 36 नई खदानें खुलवाई. जबकि झारखंड में चलती हुई खदानें भी बंद हो रही है, उनका भी लीज नवीनीकरण नहीं किया जा रहा है.

झारखंड बर्बाद हो रहा है- बाबूलाल मरांडी

बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर तंज कसते हुए कहा "झारखंड बर्बाद हो रहा है और झारखंड के मुख्यमंत्री मस्त हैं क्योंकि इनको तो लूटने में मजा आता है". झारखंड सरकार कहती है कि वह राजस्व बढ़ाने के लिए बहुत सारा काम कर रहे हैं, देश-विदेश घूम रहे हैं, लेकिन राज्यहित में उपयोग नहीं हो रहा बल्कि अवैध काम हो रहे हैं. पुलिस के संरक्षण में अवैध खनिज ट्रांसपोर्ट किया जा रहा है. 

मरांडी ने कहा कि नई योजनाएं स्वीकृत होती है तो उसको एक पोर्टल में डालना होता है, लेकिन वर्ष 2023 के बाद से पोर्टल में कुछ डाला ही नहीं गया. झारखंड सरकार की नीयत ठीक नहीं है केंद्र सरकार के पोर्टल में अगर कुछ डालेंगे तो उसको ठीक से संचालित भी करना पड़ेगा. झारखंड सरकार को डीएमएफटी फंड और उसके इस्तेमाल पर फौरन श्वेत पत्र जारी करना चाहिए. सरकार कहती है कि यह अबुआ सरकार है मगर उन्हीं अबुआ लोगों को सरकार द्वारा ठगा जा रहा है.

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