बसिया: संत जोसेफ इंटर कॉलेज और मोनफ़ोर्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में धूमधाम से मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस 

Ark Sahuliyar

प्रखंड के कोनबीर नवाटोली स्थित प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों संत जोसेफ इंटर कॉलेज और मोनफ़ोर्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में विश्व आदिवासी दिवस बेहद धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया.

नीरज कुमार साहू/न्यूज़11 भारत 
गुमला/डेस्क:
प्रखंड के कोनबीर नवाटोली स्थित प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों संत जोसेफ इंटर कॉलेज और मोनफ़ोर्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में विश्व आदिवासी दिवस बेहद धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. इस दौरान छात्र-छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए झारखंड की समृद्ध परंपरा और कला-संस्कृति की अनूठी छटा बिखेरी.

संत जोसेफ इंटर कॉलेज: पारंपरिक लोक नृत्यों से जीवंत हुई झारखंड की संस्कृति 
संत जोसेफ इंटर कॉलेज में आयोजित समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि फादर जयप्रकाश एक्का और कॉलेज के प्रिंसिपल ब्रदर सुशील टोप्पो द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर की गई. कॉलेज के विद्यार्थियों ने एक से बढ़कर एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए. इन प्रस्तुतियों में विशेष रूप से झारखंड के पारंपरिक लोक नृत्यों के माध्यम से यहाँ की धरोहर को दर्शाया गया.

इस अवसर पर बच्चों के बीच पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा के महत्व पर केंद्रित एक भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने बढ़-चढ़कर अपने विचार रखे.
कार्यक्रम को सफल बनाने में ब्रदर एडमन, ब्रदर फूलजेन्स सहित कॉलेज के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं और भारी संख्या में छात्र-छात्राओं का सराहनीय योगदान रहा.

मोनफ़ोर्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल: प्रकृति रक्षा और विरासत के सम्मान का संदेश 
वहीं दूसरी ओर, मोनफ़ोर्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में भी विश्व आदिवासी दिवस भव्य तरीके से मनाया गया. कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि ब्रदर अलबिनुस टेटे, ब्रदर आरोग्यम और ब्रदर सोनू गरिमामयी रूप से उपस्थित रहे. स्कूल के छात्र-छात्राओं ने आदिवासी समाज की संस्कृति, भाषा और सभ्यता से जुड़े बेहतरीन कार्यक्रम प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया.

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि आदिवासी संस्कृति भारत की विविधता और गौरवशाली विरासत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है. उन्होंने बच्चों से अपनी विरासत व संस्कृति का सम्मान करने और प्रकृति की रक्षा करने का पुरजोर आह्वान किया. दोनों ही संस्थानों में आयोजित इन कार्यक्रमों ने न केवल बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम किया, बल्कि आधुनिक समाज में पर्यावरण और शिक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया.