महाधिवक्ता राजीव रंजन के इस्तीफे को भाजपा ने बताया म्यूजिकल चेयर का खेल

Pramod Kumar,News11 Bharat,

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: महाधिवक्ता राजीव रंजन के इस्तीफे पर भारतीय जनता पार्टी ने हेमंत सरकार पर जोरदार हमला बोला है. भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि झारखंड में शासन नहीं, बल्कि “म्यूजिकल चेयर” का खेल चल रहा है, जहां किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का भविष्य सुरक्षित नहीं है. कब किसे पद से हटा दिया जाए, कब किससे इस्तीफा ले लिया जाए और कब किसी को बलि का बकरा बना दिया जाए, इसका फैसला योग्यता या प्रदर्शन से नहीं बल्कि सत्ता के भीतर चल रहे समीकरणों से होता है.

अजय साह ने कहा कि राजीव रंजन ने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है या उनसे दबाव बनाकर इस्तीफा दिलवाया गया है, यह बात भले ही सरकार छिपाने की कोशिश करे, लेकिन राज्य की जनता इस पूरे घटनाक्रम को भली-भांति समझ रही है. उन्होंने कहा कि पहले विनय चौबे, फिर अनुराग गुप्ता और अब राजीव रंजन—ये अलग-अलग नाम नहीं, बल्कि एक ही व्यवस्था और कार्यशैली के प्रतीक हैं.

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि वर्तमान महाधिवक्ता के कार्यकाल में झारखंड सरकार को अदालतों में लगातार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा. कई मामलों में कानूनी स्थिति इतनी कमजोर थी कि कानून के प्रथम वर्ष का छात्र भी समझ सकता था कि ऐसे मामलों का कोई ठोस आधार नहीं है, फिर भी राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उन्हें सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाया गया. परिणामस्वरूप न केवल सरकारी धन की बर्बादी हुई, बल्कि राज्य सरकार की बार-बार किरकिरी भी हुई.

अजय साह ने कहा कि महाधिवक्ता का कार्यालय राज्य सरकार का प्रभावी पक्ष रखने और न्यायालय में उसकी कानूनी मजबूती सुनिश्चित करने के लिए होता है, लेकिन दुर्भाग्य से यह कार्यालय कानूनी रणनीति का केंद्र बनने के बजाय राजनीतिक एजेंडा का अखाड़ा बनकर रह गया. गंभीर कानूनी मुद्दों को भी राजनीतिक चश्मे से देखा गया, जिसका खामियाजा राज्य को भुगतना पड़ा.

भाजपा ने मांग की है कि राजीव रंजन के पूरे कार्यकाल का श्वेत पत्र जारी किया जाए. सरकार यह सार्वजनिक करे कि उनके कार्यकाल में राज्य सरकार ने कुल कितने मुकदमे जीते, कितने हारे, बाहरी वकीलों और कानूनी सलाहकारों पर कितना खर्च किया गया, और इन खर्चों से राज्य को क्या लाभ मिला. साथ ही सरकार यह भी स्पष्ट करे कि यदि महाधिवक्ता का कार्यकाल संतोषजनक था तो उनका इस्तीफा क्यों हुआ, और यदि संतोषजनक नहीं था तो उन्हें इतने लंबे समय तक पद पर क्यों बनाए रखा गया.

भाजपा ने कहा कि झारखंड की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर इस “म्यूजिकल चेयर” के खेल में राजीव रंजन की क्या गलती थी, जिसके कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा. सरकार को पर्दे के पीछे चल रहे सत्ता संघर्ष और सौदेबाजी की राजनीति पर चुप्पी तोड़नी चाहिए तथा पूरे मामले की सच्चाई जनता के सामने रखनी चाहिए.

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