फर्जी आरोपों पर यूसिल कर्मी अरुण कुमार बर्मा को फंसाए जाने के मामले में चाईबासा सहायक श्रमायुक्त ने प्रबंधन को भेजा नोट

Pramod Kumar,News11 Bharat,

चाईबासा कोर्ट में सुनवाई कल, कंपनी के जांच अधिकारी अधिकारी महेश साहू की बढ़ी मुश्किले

विद्या शर्मा/न्यूज11  भारत

जादूगोड़ा/डेस्क:  दो साल पहले  आठ अक्टूबर 2024 को बिना कारण बताओ नोटिस   व  दोष सिद्ध हुए  बैगर यूसिल की जादूगोड़ा मिल डिविजन के बिजली वाले विभाग में  पदस्थापित कम्पनी कर्मी अरुण कुमार बर्मा को  यूसिल प्रबंधन द्वारा 28 दिनों तक तक सस्पेंड कर  उसके वेतन  से डेढ़  लाख हजार रुपये  की कटौती मामले में  चाईबासा के सहायक श्रमायुक्त शुभांक संजीव ने संज्ञान लिया है व यूसिल प्रबंधन  व पीड़ित कंपनी कर्मी अरुण बर्मा को कल बृहस्पतिवार 13  अगस्त को दोनों पक्षों को सहायक श्रमायुक्त, चाईबासा कोर्ट में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने हेतु सम्मन  जारी की है..

पत्र की कॉपी यूसिल कर्मी अरुण कुमाए बर्मा को भी भेजी है.  इस मामले में  जांच अधिकारी महेश साहू को परेशानी बढ़ गई है. जांच अधिकारी महेश साहू पर आरोप है कि  इस मामले में जांच  को जानबूझ कर लटकाये रखा. व चाइबासा  के सहायक श्रमायुक्त शुभंक संजीव को निलंबन का पैसा वापसी का झूठा भरोसा  देकर मामले की उलझाए रखा .जिससे खफा होकर चाईबासा के सहायक श्रमायुक्त शुभंक  संजीव को मजबूरन कोर्ट में हाजिर होने के लिए  सम्मान जारी करनी पड़ी.इस  सम्मन  के बाद पीड़ित कंपनी कर्मी अरुण बर्मा को उम्मीद जगी है कि उस अब न्याय  मिलेगा व 28 दिन निलंबन का करीबन डेढ़ लाख रुपया की वापसी होगी.यूसिल प्रबंधन पर गैर कानूनी तरीके से मजदूरों की  गाढ़ी कमाई लूटने का यह पहला मामला नहीं है.

इसके पूर्व यूसिल के पूर्व कर्मचारी विद्या शर्मा  पर भी कम्पनी ने झूठा आरोप लगाकर वर्ष 1920  _ 1921 में  यूसिल के तकनीकी निर्देशक के पद से हटाए गए अब  कंपनी के महाप्रबंधक  मनोज कुमार ने भी  दो सालाना इंक्रीमेंट  को होल्ड कर तीन लाख की राशि जप्त कर रखी है जिसका मामला धनबाद कोर्ट में लंबित है. इसी तरह  वी आर एस कर्मचारियों, समेत कई कर्मचारी कोर्ट से न्याय की गुहार लगा रहे है. बहरहाल देखना यह है कि यूसिल प्रबंधन  कोर्ट में करोड़ो रुपया खर्च कर मजदूरों की गाढ़ी कमाई पर कब तक कुंडली मारकर बैठती है यह देखने वाली बात होगी.

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