भाकपा माले ने रास चुनाव के बाद दिया बड़ा बयान, कहा- 'छोटे दलों को कांग्रेस बदनाम न करे...'

Vaibhaw Vikram

राज्य सभा चुनाव में महागठबंधन के प्रत्याशी प्रणव झा को महज 19 वोट मिलने व हार जाने के मामले में आरोप प्रत्यारोप जारी है. एक तरफ जहां कांग्रेस ने वामदल पर पैसे लेकर बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष मतदान करने

संदीप बरनवाल/न्यूज़11भारत
गावां/डेस्क:
राज्य सभा चुनाव में महागठबंधन के प्रत्याशी प्रणव झा को महज 19 वोट मिलने व हार जाने के मामले में आरोप प्रत्यारोप जारी है. एक तरफ जहां कांग्रेस ने वामदल पर पैसे लेकर बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष मतदान करने का आरोप लगाया है. तो वहीं भाकपा माले ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए ईमानदारी पूर्वक हार की जिम्मेवारी लेने की सलाह देते हुए वाम दलों पर आरोप लगाये जाने की कड़ी निंदा की है. भाकपा माले के धनवार पूर्व विधायक राजकुमार यादव ने कहा की महागठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल रहने के बावजूद भी प्रणव झा को मात्र 19 वोट ही प्राप्त होना और हार जाने के बाद महागठबंधन के मुख्य दल झामुमो और कांग्रेस को ईमानदारी से हार की जिम्मेवारी लेनी चाहिए एवं छोटे दलों पर आरोप लगाकर अपनी हार का ठीकरा फोड़ना कहीं से सही नहीं है. 

उन्होंने कहा कि जब 28 /28 मत से दोनों उम्मीदवार की जीत तय हो रही थी तो उस हालत में झामुमो के उम्मीदवार को तीस से अधिक मत मिलना और तीन वोट रद्द होना कई सवाल खड़े करता है. अपने आप में गठबंधन के सभी दलों को जांच करनी चाहिए. हमेशा जब बड़े दलों के उम्मीदवार की हार होती है तो इसके बाद छोटे दलों को बदनाम करके और उनकी साख को गिराने की साजिश की जाती है . जो सही नहीं है. बिहार में भाकपा माले ने कांग्रेस के उम्मीदवार अखलेश सिंह को जीताने का काम किया अभी हाल के चुनाव में बिहार में राजद के उम्मीदवार को हराने का काम कांग्रेस के ही एक विधायक ने किया. 

उस समय भी भाकपा माले ईमानदारी से वोट डाला,महागठबंधन अतिआत्म विश्वास के कारण और झारखंड में छोटे दलों के विधायकों और स्वयं अपने पार्टी के विधायकों और सभी पार्टी के नेताओं से विचार विमर्श नहीं करके और अपने मन से कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार देना भी हार का मुख्य कारण है. उन्होंने कहा कि एक थैलीशाह को भाजपा ने उम्मीदवार बनाकर साफ संकेत दे दिया है की झारखंड में भी लोट्स ऑपरेशन किया जा सकता है और माले ने सरकार से कोई लाभ का पद मंत्री से लेकर पोस्ट तक नहीं लिया है और न कभी सरकार को पद के लिए दबाब बनाया है. 

ऐसी स्थिति में माले के खिलाफ कांग्रेस प्रभारी के द्वारा बयान देना कहीं से सही नहीं है 2018 में भी कांग्रेस ने यही खेल खेली थी और पार्टी को बदनाम किया था. उस समय भी प्रभारी झारखंड के वही हरियाना के थे जो आज भाजपा में है. कांग्रेस अपना बयान को वापस ले . भाकपा माले इस बयान की कड़ी निंदा करती है. माले सम्प्रदायिक फासीवाद के खिलाफ मजबुती से भाजपा के नीतियों के खिलाफ लड़ेगी. भाकपा माले अपनी पार्टी की ओर से भी एजेण्ट दिया था जिन्होंने कहा की इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार को हमारे विधायकों ने वोट किया.

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