बोकारो के कनारी गांव भूमि अधिग्रहण मामले में हाईकोर्ट में अहम सुनवाई, बिना मुआवजा जमीन उपयोग का आरोप

Ark Sahuliyar

दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

न्यूज़11 भारत 
रांची/डेस्क:
बोकारो के कनारी गांव भूमि अधिग्रहण मामले में झारखंड हाई कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. मामले में चार याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उनकी जमीन का उपयोग वर्षों से किया जा रहा है, लेकिन अब तक उन्हें मुआवजा नहीं मिला. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के निर्देश पर गठित जांच समिति की रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष रखी गई, जिसमें कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए. कोर्ट में सुनवाई के दौरान बोकारो स्टील लिमिटेड और राज्य सरकार के रुख में विरोधाभास भी देखने को मिला. बीएसएल ने स्वीकार किया कि कई लोगों को मुआवजा नहीं मिला, जबकि राज्य सरकार ने पहले जिस 'पंजी-2' में जमीन की एंट्री को माना था, बाद में उसी रिकॉर्ड के उपलब्ध नहीं होने की दलील दी. 

अधिवक्ता संजीव ठाकुर ने बताया कि कनारी गांव में वर्ष 1956 से 1981 के बीच अलग-अलग चरणों में करीब 2700 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था. लगभग 560 एकड़ जमीन अधिग्रहित नहीं किया गया था लेकिन अब उसे भी अधिग्रहित करने का प्रयास किया जा रहा है. याचिकाकर्ताओं की मांग है कि उनकी जमीन का उपयोग करने के बदले उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद झारखंड हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. मामले में शिला देवी, पागल साव, फुलिया देवी और सम्फुरण राजहंस की ओर से याचिका दाखिल की गई है. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता संजीव ठाकुर, जगत कुमार सोनी, रवि कुमार पांडेय और शिवम कुमार झा ने पक्ष रखा.

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