राज्यसभा में उठी रांची के CIP को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान बनाने की मांग

Dipali Kumari

राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने राज्यसभा में सीआईपी को राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान घोषित करने की मांग की.

न्यूज़11 भारत 
रांची/डेस्क:
 राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने आज राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान झारखंड की राजधानी राँची स्थित केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (सीआईपी) को संसद के पृथक अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान घोषित करने की मांग की.

डॉ. वर्मा ने सदन के माध्यम से केंद्र सरकार का ध्यान इस विषय की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि वर्ष 1918 में स्थापित सीआईपी देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में से एक है. यह संस्थान मानसिक रोगों के उपचार के साथ-साथ मनोचिकित्सा, नैदानिक मनोविज्ञान, मनोचिकित्सीय सामाजिक कार्य, नर्सिंग, पुनर्वास, तंत्रिका विज्ञान तथा जन-मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में दीर्घकाल से महत्त्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान कर रहा है.

उन्होंने कहा कि 108 वर्ष पुराना यह संस्थान प्रत्येक वर्ष 1,17,000 से अधिक रोगियों का उपचार करता है, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत रोगी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित हैं.

डॉ. वर्मा ने देश में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित करते हुए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की “Accidental Deaths & Suicides in India–2024” रिपोर्ट का उल्लेख किया. रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में देश में कुल 1,70,746 आत्महत्याएँ दर्ज की गईं.

पेशागत श्रेणियों में 52,910 दिहाड़ी मजदूर, 22,113 गृहिणियाँ, 17,886 स्वरोजगार से जुड़े व्यक्ति, 16,905 पेशेवर एवं वेतनभोगी व्यक्ति, 14,778 बेरोजगार, 14,488 विद्यार्थी, 12,811 निजी क्षेत्र के कर्मचारी, 11,015 व्यवसाय से जुड़े व्यक्ति तथा कृषि क्षेत्र से जुड़े 10,546 व्यक्ति शामिल थे.

उन्होंने कहा कि ये आँकड़े दर्शाते हैं कि आत्महत्या की समस्या विद्यार्थियों, श्रमिकों, किसानों, बेरोजगारों, कर्मचारियों, गृहिणियों और स्वरोजगार से जुड़े नागरिकों सहित समाज के विविध वर्गों को प्रभावित कर रही है. अतः देश में सुलभ, विशिष्ट और संस्थागत मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की तत्काल आवश्यकता है.

डॉ. वर्मा ने सदन को अवगत कराया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी विभागीय संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 148वीं रिपोर्ट—“Mental Health Care and Its Management in Contemporary Times” में सीआईपी, राँची को राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान घोषित किए जाने की स्पष्ट अनुशंसा की है. राज्यसभा में 8 दिसंबर 2023 को विशेष उल्लेख के माध्यम से भी यह माँग उठाई जा चुकी है.

उन्होंने केंद्रीय बजट 2026-27 में राँची और तेजपुर स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को क्षेत्रीय शीर्ष संस्थानों के रूप में उन्नत करने की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि यह घोषणा सीआईपी को वैधानिक, शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करने की दिशा में आगे बढ़ने का उपयुक्त अवसर देती है.

भूमि से संबंधित अभिलेखों का उल्लेख करते हुए डॉ. वर्मा ने कहा कि वर्तमान अभिलेखीय विवरण के अनुसार केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान, राँची के अधीन लगभग 229.29 एकड़ तथा राँची तंत्रिका मनोचिकित्सा एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान के अधीन लगभग 322.94 एकड़ भूमि उपलब्ध बताई गई है. इस प्रकार दोनों संस्थानों के अधीन वर्तमान में उपलब्ध भूमि का संयुक्त क्षेत्रफल 552.23 एकड़ है.

उन्होंने कहा कि गजट एवं पुराने भूमि-अभिलेखों में दर्ज कुल 891.532 एकड़ भूमि और वर्तमान में दोनों संस्थानों के अधीन उपलब्ध 552.23 एकड़ भूमि के बीच 339.302 एकड़ का अंतर परिलक्षित होता है. इस अंतर वाली भूमि की वर्तमान राजस्व स्थिति, स्वामित्व, हस्तांतरण एवं वास्तविक कब्जे की स्वतंत्र जाँच आवश्यक है.

डॉ. वर्मा ने कहा कि संसद ने पूर्व में भी पृथक केंद्रीय कानून बनाकर महत्त्वपूर्ण चिकित्सा संस्थानों को राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान घोषित किया है. राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका-विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु—निमहांस को राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका-विज्ञान संस्थान, बंगलौर अधिनियम, 2012—निमहांस अधिनियम, 2012 तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान अधिनियम, 1956—एम्स अधिनियम, 1956 द्वारा राष्ट्रीय महत्त्व के संस्थान का दर्जा प्रदान किया गया है.

बाद में स्थापित अन्य अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों को भी उक्त अधिनियम में किए गए संशोधनों के माध्यम से यह दर्जा प्रदान किया गया है. अतः केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान, राँची के संबंध में भी इसी प्रकार की विधायी पहल संवैधानिक और संस्थागत दृष्टि से पूर्णतः उपयुक्त होगी.

राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान, राँची को संसद के पृथक अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान घोषित करने तथा उसे मानसिक स्वास्थ्य, तंत्रिका विज्ञान, शिक्षण, प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं रोगी देखभाल के क्षेत्र में आवश्यक वैधानिक, शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करने हेतु समयबद्ध कार्रवाई की जाए.