हाथी बना सिमडेगा का बड़ा समस्या, झुंड से बिछड़े दो हाथी क्षेत्र में आतंक मचा रहे हैं, ग्रामीण परेशान

Pramod Kumar,News11 Bharat,

बरसात आते ही हाथी भोजन की तलाश में गांव की तरफ करते हैं रुख, मचाते हैं तबाही

आशिष शास्त्री/न्यूज11  भारत

सिमडेगा/डेस्क:  सिमडेगा जिला में पिछले लंबे समय से जंगली हाथी एक गंभीर समस्या बनी हुई है. अभी हाल के दिनों में इन हाथियों के झुंड से बिछड़े दो हाथी क्षेत्र में आतंक मचा रहे है.  इन हाथियों के झुंड से बिछुड़ा दो हाथी मचा रहा है आतंक. ग्रामीण हैं परेशान. सिमडेगा के विभिन्न प्रखंडों में काफी लंबे समय से जंगली हाथी अपना अड्डा जमाए बैठे है. बरसात आते हीं हाथी भोजन की तलाश में गांव की तरफ रूख कर ग्रामीणों के घरों को तोड़कर घर में रखे अनाज खा जाते हैं. इस दौरान हाथी की चपेट में आने से ग्रामीण घायल होते हैं और कुछ की मौत भी हो जाती है. हाथियों के इस आतंक के कारण सिमडेगा के बानो, जलडेगा, बांसजोर और बोलबा क्षेत्र अक्सर हाथी रात में आकर आतंक मचा कर भरी बरसात ग्रामीणों के आशियाने उजाड़ देते है. जिस कारण ग्रामीणों को अक्सर रतजग्गा करना पड़ता है. ग्रामीण वन विभाग से बार बार मदद की गुहार लगाते रहते हैं.

झुंड से बिछडकर दो हाथी पिछले छह-सात माह से कोलेबिरा, जलडेगा बानो और बोलबा क्षेत्र में आतंक मचा रहे हैं. हाथियों के आतंक से कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोंगाड़ी काफी चिंतित नजर आए. उन्होने कहा हाथियों के कारण लोग रतजगा कर रहे जिससे ग्रामीणों को कार्य करने में परेशानी होती है. उन्होने कहा अब वे हाथियों की समस्या के लिए आरपार की लडाई लडेगें. 

वहीं वन विभाग की माने तो वन विभाग हाथी प्रभावित क्षेत्रों में हाथी भागने के लिए मशाल आदि देता है. साथ हीं वन विभाग लोगों से घर पर शराब आदि नहीं रखने की सलाह भी देता है. 

सिमडेगा में हाथी की समस्या तो लंबे समय से बनी है, लेकिन अभी तक तो हाथियों की समस्या के समाधान का सार्थक प्रयास नहीं हुआ है. अगर वाकई एक सार्थक प्रयास हो तो संभव है सिमडेगावासीयों को गजराज के कहर से निजात मिल जाए.

यह भी पढ़ें: रांची विश्वविद्यालय के 67वें स्थापना दिवस पर तीन दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत