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रांची/डेस्क: झारखंड में हुए कथित बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की जनहित याचिका (PIL) पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. हाई कोर्ट ने मामले से जुड़े डिफेक्ट (खामियों) को दूर करने के लिए दायर की गई आईए IA (Interlocutory Application) को स्वीकार कर लिया है. अब इस मामले को अगली निर्धारित तिथि पर फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा. फिलहाल, मुख्य न्यायाधीश एम एस सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस मामले में कोई आदेश पारित नहीं किया है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता बाबूलाल मरांडी की ओर से अधिवक्ता सूरज किशोर ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता विभोर मयंक ने दलीलें पेश कीं. याचिका में तकनीकी सुधार के लिए दाखिल IA को कोर्ट ने मंजूरी दे दी, जिससे अब मामले की आगे सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है.
याचिका में लगाए गए मुख्य आरोप
इस जनहित याचिका में राज्य की मौजूदा शराब नीति और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए CBI से जांच कराने की मांग की है. याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) एफआईआर दर्ज होने के 14 महीने बाद भी सक्षम अदालत में चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी है. इसका लाभ उठाते हुए कई मुख्य आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिल चुकी है, जिससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं. इसके अलावा, याचिका में दावा किया गया है कि छत्तीसगढ़ मॉडल की आड़ में झारखंड में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ है. वर्ष 2022 में लागू शराब नीति के तहत फर्जी बैंक गारंटी के माध्यम से कथित रूप से चहेती प्लेसमेंट एजेंसियों को टेंडर दिए गए, जिससे राज्य के राजस्व को भारी नुकसान हुआ.