न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क: झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने एक प्रेस रिलीज जारी करते हुए कहा कि झारखंड में घोटालों से बड़ा घोटाला 'जांच घोटाला' है. आज झारखंड का युवा एक गंभीर प्रश्न पूछ रहा है. क्या हर बार कहानी एक ही तरह आगे बढ़ती रहेगी? इससे पहले झारखंड SSC घोटाले की जांच के लिए SIT बनाई गई. आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, महत्वपूर्ण साक्ष्य भी मिले, लेकिन उस समय केवल अध्यक्ष से इस्तीफा लेकर उन्हें सुरक्षित निकास (safe exit) दे दिया गया. अब JPSC के मामले में भी वही खेल दोहराया जा रहा है.
रघुवर दास ने कहा कि झारखंड में मुद्दा केवल घोटालों की जांच का नहीं है, बल्कि 'जांच घोटाले' का है. यहां जो भी कार्रवाई हो रही है, उसका उद्देश्य दोषियों को सजा दिलाना नहीं, बल्कि घोटालों में शामिल सत्ता के शीर्ष पर बैठे प्रभावशाली लोगों और नौकरशाहों को बचाना तथा साक्ष्यों को मिटाना प्रतीत होता है. शराब घोटाला, जमीन घोटाला, अवैध खनन घोटाला और DMFT घोटाला इन सभी मामलों की जांच में यदि राज्य की मशीनरी का उपयोग साक्ष्यों को नष्ट करने और अपने चहेतों को बचाने के लिए किया जा रहा है, तो यह स्वयं न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए गंभीर चिंता का विषय है.
झारखंड में कमजोर नीयत वाले नौकरशाह मुख्यमंत्री के सबसे महत्वपूर्ण हथियार बन गए हैं. इनके माध्यम से घोटाले किए जा रहे हैं, जमीन, बालू और पत्थर की लूट हो रही है, युवाओं के भविष्य का सौदा किया जा रहा है और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. इसलिए केवल घोटालं की ही नहीं, बल्कि घोटालों की जांच के नाम पर चल रहे 'जांच घोटाले' की भी CBI जांच कराई जानी चाहिए, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो, असली दोषियों का पर्दाफाश हो और इन्हें कानून के अनुसार सजा मिल सके.
<iframe src="https://www.facebook.com/plugins/post.php?href=https%3A%2F%2Fwww.facebook.com%2Fpermalink.php%3Fstory_fbid%3Dpfbid0p5QNrwZCBzt6ur3NM9G1tmP792ozPMAzg7BNBrkB4we2K8BDh9jSeoQV7SERvXrWl%26id%3D100044484244377&show_text=true&width=500" width="500" height="718" style="border:none;overflow:hidden" scrolling="no" frameborder="0" allowfullscreen="true" allow="autoplay; clipboard-write; encrypted-media; picture-in-picture; web-share"></iframe>
यह भी पढ़ें- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा की