पुनर्बहाली के बाद निलंबन पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

Ark Sahuliyar

न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क:
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य शिक्षा सेवा की अधिकारी फरहाना खातून से जुड़े अवमानना मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने सुनवाई के दौरान पूछा कि जिस आदेश के आलोक में फरहाना खातून को पुनर्बहाल किया गया था, उसी आदेश को बाद में निलंबित क्यों कर दिया गया. अदालत ने यह भी जानना चाहा कि यदि निलंबन प्रभावी है तो संबंधित अधिकारी को नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता (सब्सिस्टेंस अलाउंस) दिया जा रहा है या नहीं.

मामले की सुनवाई कंटेम्प्ट (सिविल) फाइलिंग संख्या 1502/2026 में हुई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी राय ने अदालत को बताया कि सरकार ने फरहाना खातून को पुनर्बहाल करने का आदेश जारी किया, लेकिन बाद में उसी आदेश को निलंबित कर दिया गया. उन्होंने दलील दी कि विभागीय कार्यवाही लंबित रहने की स्थिति में संबंधित अधिकारी को सेवा नियमों के तहत मिलने वाला जीवन-निर्वाह भत्ता उपलब्ध कराया जाना चाहिए.

वहीं, राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित आदेश की समीक्षा के लिए आवेदन दायर किया गया है. अदालत ने समीक्षा आवेदन को स्वीकार करते हुए सरकार को मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.

सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि यदि पुनर्बहाली संबंधी आदेश को निलंबित किया गया है, तो उसके पीछे के कारणों और उससे उत्पन्न प्रशासनिक स्थिति को स्पष्ट करना आवश्यक है. अदालत ने सरकार से इस संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण देने को कहा है. फरहाना खातून द्वारा दायर अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि न्यायालय के आदेश की भावना के अनुरूप कार्रवाई नहीं की गई. इसी संदर्भ में अदालत मामले की निगरानी कर रही है और सरकार से जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई अब 24 जून को निर्धारित की गई है.

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