झारखंड लॉ ऑफिसर्स एंगेजमेंट रूल्स 2026 को हाईकोर्ट में चुनौती, राज्य सरकार से जवाब तलब

Dipali Kumari

न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया.

न्यूज़11 भारत 
रांची/डेस्क: 
झारखंड उच्च न्यायालय में आज बुधवार को झारखंड लॉ ऑफिसर्स एंगेजमेंट रूल्स, 2026 को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से नियमों की संवैधानिक वैधता पर कई अहम प्रश्न उठाए गए. न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया, जिसके बाद अगली सुनवाई तक नियुक्ति प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ने का आश्वासन महाधिवक्ता की ओर से दिया गया.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह मूल संवैधानिक प्रश्न उठाया गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 165 तथा अनुच्छेद 217 के अनुसार 10 वर्ष का अनुभव रखने वाला अधिवक्ता राज्य का महाधिवक्ता नियुक्त हो सकता है और उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए भी पात्र होता है. इसके बावजूद Jharkhand Law Officers Engagement Rules, 2026 में अतिरिक्त महाधिवक्ता, वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता तथा अन्य विधि पदाधिकारियों के लिए ऐसी पात्रता निर्धारित की गई है, जो संविधान में निर्धारित योग्यता से भी अधिक कठोर है. याचिकाकर्ता का कहना था कि इससे 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले अधिवक्ताओं के आवेदन करने और उनके नाम पर विचार किए जाने का अधिकार ही समाप्त हो जाता है, जो मनमाना एवं संविधान के समानता के सिद्धांत के विपरीत है.

याचिका में वर्ष 2026 के संशोधित नियमों के एक अन्य प्रावधान को भी चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि पहले के नियमों के अनुसार प्रत्येक लॉ ऑफिसर के साथ एसोसिएट काउंसिल की व्यवस्था थी, लेकिन नए संशोधन में इस व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है. 

अब सरकारी अधिवक्ता बिना एसोसिएट काउंसिल के कार्य करेंगे. इससे पहले 2018 के रूल्स में एसोसिएट काउंसिल की व्यवस्था थी. अगर बात करें देशभर के उच्च न्यायालय की तो सभी मे एसोसिएट काउंसिल की व्यवस्था है. याचिकाकर्ता का तर्क है कि बढ़ती महंगाई के दौर में एसोसिएट काउंसिल की व्यवस्था समाप्त करना उनके हितों के विपरीत है तथा यह समानता के संवैधानिक सिद्धांत का उल्लंघन करता है.

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता की ओर से न्यायालय को बताया गया कि लॉ ऑफिसर्स के चयन के लिए आवेदन पहले ही आमंत्रित किए जा चुके हैं, लेकिन नियुक्ति की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है और इसमें कुछ समय लगेगा. राज्य सरकार की ओर से विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा गया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता लाल ज्ञान रंजन नाथ शाहदेव की ओर से और अधिवक्ता रितु कुमार, अधिवक्ता नवीन कुमार और अधिवक्ता समावेश भंजदेव ने पक्ष रखा. वहीं याचिकाकर्ता राजीव कुमार सिंह की ओर से अधिवक्ता बिनोद सिंह ने पक्ष रखा. राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता रोहितश्य रॉय और अधिवक्ता विभोर मयंक ने पक्ष रखा. मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है. 

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