झारखण्ड के CM सोरेन रामगढ़ में बाहा पूजा में हुए शामिल
ग्रामीणों ने पहनी पारंपरिक वेशभूषा
बाहा पूजा के अवसर पर गांव में विशेष तैयारियां की गई थीं. घर-घर में साफ-सफाई की गई, पारंपरिक सजावट की गई और पूजा सामग्री की समुचित व्यवस्था की गई. सारे ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए, जिससे पूरे नेमरा गांव में उत्सव जैसा वातावरण बन गया. गांव के उप-पहान छोटू बेसरा ने बताया कि बाहा पूजा संथाल समाज की एक महत्वपूर्ण और प्राचीन परंपरा है, तथा यह पर्व प्रतिवर्ष गांव की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना के साथ मनाया जाता है.
जेहर थान में मन्नत मांगने की परंपरा चली आ रही सालों से
गौरतलब है कि इस पूजा के दौरान श्रद्धालु जेहर थान (सरना स्थल) पर पहुंचकर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं. इसके अलावा यह मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद यहां पूरी होती है, और मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु बकरे, मुर्गे आदि की बलि चढ़ाकर पूजा-अर्चना करते हैं. यह अनुष्ठान ग्राम देवताओं, प्रकृति और सामुदायिक एकता के प्रति एक गहरी आस्था की प्रतीक माना जाता है.
CM सोरेन परंपरा को बढ़ा रहे आगे
[caption id="attachment_138900" align="alignnone" width="1200"]ग्रामीणों के कथन के अनुसार, पूर्व में दिशोम गुरु शिबू सोरेन इस पूजा में नियमित रूप से शामिल होते थे. उनके निधन के बाद अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. गांव के बुजुर्गों ने बताया कि मुख्यमंत्री का हर वर्ष बाहा पूजा में शामिल होना न केवल पारिवारिक परंपरा का निर्वहन है, बल्कि संथाल संस्कृति और आदिवासी परंपराओं के संरक्षण का भी सशक्त संदेश देता है.