झामुमो पूर्वी सिंहभूम जिला अध्यक्ष विक्टर सोरेन ने जिला संपर्क कार्यालय साकची में विश्व आदिवासी दिवस पर रखे अपने विचार

Pramod Kumar,News11 Bharat,

झारखंड के आदिवासी वीर सपूतों को अर्पित किया श्रद्धासुमन

प्रभात कुमार/न्यूज11  भारत 

जमशेदपुर/डेस्क: विश्व आदिवासी दिवस के ऐतिहासिक महत्व को देश और समाज के हर नागरिक को समझना होगा.आदिवासी समाज के वीर सपूतों ने अपनी स्वशासन व्यवस्था,जल जंगल जमीन की रक्षा के लिए उस वक्त अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संगठित होकर विद्रोह किया,जब पूरा देश अंग्रेजी हुकूमत की खिलाफ गोलबंद होने के लिए नेतृत्व की खोज में था . आदिवासी समाज ने 1855 में सिद्धू कान्हु चांद भैरव फूलो झानो के नेतृत्व में हुल विद्रोह के रूप में संगठित होकर अपना विरोध प्रकट किया और अंग्रेजी शासन की चूले हिला दी . इसके बाद के वर्षो में समय समय पर इन विद्रोहों को बाबा तिलका मांझी,धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, पोटो हो,तैलंग खड़िया समेत कई अन्य वीर शहीदों ने नेतृत्व प्रदान किया. आजादी के बाद पुन: सामाजिक सुधार,अपनी अस्मिता, हाषा भाषा,आदिवासी मूलवासी बहुल क्षेत्रों में क्रमबद्ध विकास जैसे विषयों पर अपनी उपेक्षा को लेकर झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में भी कई आदिवासी महापुरुषों ने अपनी शहादत दी, और अंततः लड़कर अलग राज्य प्राप्त किया. हम आज के दिन उन तमाम आदिवासी वीर सपूतों को अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए हृदय से नमन करते हैं.

यह विचार झारखंड मुक्ति मोर्चा पूर्वी सिंहभूम जिला अध्यक्ष विक्टर सोरेन ने झामुमो जिला संपर्क कार्यालय साकची में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में रखी. इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष सागेन पूर्ति ने कहा कि इन सभी आदिवासी वीरों का समाज सदैव ऋणी रहेगा और हमे उनके दिखाए गए मार्ग का पूर्णत:अनुकरण करना चाहिए. सर्वप्रथम जिला अध्यक्ष विक्टर सोरेन के नेतृत्व में उपस्थित झामुमो वरीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अमर आदिवासी शहीदों,सिद्धू कान्हु,चांद भैरव,फूलो झानो, बाबा तिलका मांझी,धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा,तैलंग खड़िया, पोटो हो समेत पद्मभूषण दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवम पुष्पांजलि कर दिया और इन महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया.

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