आशिष शास्त्री/न्यूज11 भारत
सिमडेगा/डेस्क: प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध सिमडेगा जिला आज नवाचार आधारित आजीविका मॉडल के जरिए ग्रामीण और जनजातीय परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है. जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग की पहल पर केलाघाघ जलाशय में शुरू किया गया जायंट फ्रेशवॉटर प्रॉन (विशाल मीठे पानी का झींगा) पालन अब जनजातीय समुदायों के लिए आय, पोषण और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन गया है.
स्थानीय संसाधनों के वैज्ञानिक और सतत उपयोग के उद्देश्य से वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक के लिए केलाघाघ जलाशय में पायलट परियोजना के रूप में इस योजना की शुरुआत की गई. परियोजना का मुख्य उद्देश्य जनजातीय परिवारों की आजीविका को मजबूत करना, रोजगार के नए अवसर सृजित करना और उनकी आय में वृद्धि करना है.
परियोजना के तहत गठित मत्स्यजीवी सहयोग समिति के करीब 300 सदस्य सामूहिक रूप से जायंट फ्रेशवॉटर प्रॉन का पालन कर रहे हैं. वैज्ञानिक पद्धति, नियमित प्रशिक्षण और विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन के कारण यह पहल अब एक सफल एवं टिकाऊ आजीविका मॉडल के रूप में स्थापित हो चुकी है.
वर्तमान में समिति के 20 से 30 सक्रिय सदस्य प्रतिदिन 1.5 से 2 किलोग्राम प्रॉन का उत्पादन एवं विपणन कर रहे हैं. बाजार में इसकी कीमत ₹600 से ₹1000 प्रति किलोग्राम तक मिल रही है, जिससे प्रत्येक सक्रिय सदस्य को सालाना ₹2 से ₹3 लाख तक की अतिरिक्त आय हो रही है. इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा पोषण पर खर्च बढ़ा है.
मत्स्य विभाग द्वारा नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, मॉनिटरिंग और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से समिति के सदस्यों को लगातार सहयोग दिया जा रहा है. आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों को अपनाने से उत्पादन और आय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है.
केलाघाघ का यह मॉडल अब जिले की सीमाओं से बाहर भी पहचान बना चुका है. सोशल मीडिया पर इसकी लोकप्रियता बढ़ने के बाद रांची, धनबाद तथा ओडिशा के सुंदरगढ़, बिरमित्रपुर सहित कई क्षेत्रों से खरीदार सीधे केलाघाघ पहुंचकर जायंट फ्रेशवॉटर प्रॉन की खरीदारी कर रहे हैं. इससे स्थानीय उत्पाद को बेहतर बाजार मिलने के साथ ग्रामीणों की आय में निरंतर वृद्धि हो रही है.
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