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रांची/डेस्क: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते की CID द्वारा गिरफ्तारी महज दिखावे की है. हेमंत सरकार विनय चौबे की तरह इन्हें भी बिना चार्जशीट दाखिल किए डिफॉल्ट बेल दिलाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देगी. छात्रों की मांग सिर्फ JPSC तक सीमित नहीं है. JSSC की सहायक आचार्य, CGL, उत्पाद सिपाही और PGT जैसी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली कर नौकरियां बेची गई है.
सरकार यदि वास्तव में कार्रवाई करना चाहती है, तो JPSC के तीनों सदस्यों के साथ-साथ JSSC-CGL परीक्षा के दौरान आयोग में जिम्मेदार तत्कालीन अधिकारियों नीरज सिन्हा और सुधीर गुप्ता तथा अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड अपने पास रखने वाले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी विनोद की भी गिरफ्तारी करे. साथ ही JSSC के प्रभारी चेयरमैन IAS प्रशांत कुमार को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाए व पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए CBI जांच का आदेश दिया जाए.
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