वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा अपडेट, 24 अगस्त से शुरू होगा सुधार का काम,  14 अक्टूबर तक निपटाए जाएंगे दावे-आपत्तियां

Dipali Kumari

रवि कुमार ने बताया कि 24 अगस्त से नो-मैपिंग, तार्किक विसंगति और अन्य मामलों से जुड़े मतदाताओं की सुनवाई शुरू होगी.

न्यूज़11 भारत 
रांची/डेस्क:
 झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि 24 अगस्त से नो-मैपिंग, तार्किक विसंगति और अन्य मामलों से जुड़े मतदाताओं की सुनवाई शुरू होगी. उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को सही और अपडेट करना है, ताकि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक वोटर लिस्ट से बाहर न रहे और कोई अपात्र या विदेशी नागरिक इसमें शामिल न हो. इसके तहत नाम जोड़ने, सुधार करने और अन्य दावों-आपत्तियों की जांच की जाएगी.

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि नो-मैपिंग, तार्किक विसंगति और अन्य सूची में शामिल मतदाताओं को ईआरओ की ओर से नोटिस दिया जाएगा. नोटिस मिलने के बाद दस्तावेज जमा करने के लिए पहले 7 दिन का समय मिलेगा. अगर इस दौरान दस्तावेज नहीं दिए गए, तो बीएलओ दोबारा संपर्क कर नोटिस देंगे और 7 दिन का अतिरिक्त समय दिया जाएगा. दावा-आपत्ति की प्रक्रिया 5 अगस्त से 15 सितंबर तक चलेगी. इन दावों और आपत्तियों का निपटारा संबंधित निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी 14 अक्टूबर 2026 तक कर सकेंगे.

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि फिलहाल राज्य में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, दावे-आपत्तियां लेने और जरूरी सुधार करने का काम चल रहा है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों का नाम किसी दूसरे राज्य की वोटर लिस्ट में है और वे झारखंड की मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना चाहते हैं, उनसे फॉर्म-8 और घोषणा पत्र लिया जा रहा है. इसके बाद उनका नाम संबंधित मतदान केंद्र की सूची में जोड़ने की प्रक्रिया की जा रही है. इसके अलावा, एक ही परिवार के सदस्यों का नाम एक ही मतदान केंद्र की मतदाता सूची में दर्ज करने का काम भी किया जा रहा है.

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत केवल भारतीय नागरिक ही मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं. उन्होंने राजनीतिक दलों, बीएलए-2 और आम लोगों से अपील की कि अगर किसी विदेशी नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में शामिल होने की कोशिश हो रही है या ड्राफ्ट सूची में उसका नाम है, तो फॉर्म-7 भरकर आपत्ति दर्ज कराएं. इसके बाद ईआरओ/एईआरओ स्तर पर दस्तावेजों की जांच कर उचित फैसला लिया जाएगा.

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने अपील की कि किसी भी विदेशी नागरिक को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने में सहयोग न करें. अगर किसी परिवार में शादी या किसी अन्य कारण से कोई विदेशी नागरिक रह रहा है, तो उसे पहले गृह मंत्रालय से भारतीय नागरिकता हासिल करनी होगी. नागरिकता मिलने से पहले वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन करना दंडनीय अपराध है.

उन्होंने बताया कि नोटिस, दावा-आपत्ति, जरूरी दस्तावेज और SIR से जुड़ी किसी भी जानकारी या मदद के लिए निर्वाचन आयोग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1950 पर संपर्क किया जा सकता है.