मनोहरपुर: कांवड़ियों की सेवा में शिव महिमा कांवड़ियां संघ का 32वां वर्ष, निःशुल्क चिकित्सा शिविर व भंडारे का आयोजन

Pramod Kumar,News11 Bharat,

श्रद्धालुओं का पहला जत्था 3 अगस्त को सोमवारी का जलाभिषेक कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करेगा

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: पवित्र सावन माह के आगमन के साथ झारखंड-ओड़िशा सीमावर्ती क्षेत्र के प्रसिद्ध महादेवसाल शिव मंदिर में बाबा भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए कांवड़ियों का आगमन शुरू हो गया है. श्रद्धालुओं का पहला जत्था आगामी सोमवारी 03 अगस्त को जलाभिषेक कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करेगा.

इसी अवसर पर श्री श्री शिव महिमा कांवड़ियां संघ, बिश्रा रोड, राउरकेला (ओड़िशा) द्वारा शनिवार को मनोहरपुर रेलवे स्टेशन परिसर में निशुल्क चिकित्सा शिविर एवं भंडारे का आयोजन किया गया. संघ पिछले 32 वर्षों से निरंतर कांवड़ियों की निःस्वार्थ सेवा करता आ रहा है.

संघ के संस्थापक एवं मुख्य संचालनकर्ता ईश्वरदास मित्तल ने बताया कि यह सेवा कार्य राउरकेला के धर्मप्रेमियों के आर्थिक सहयोग और संघ के समर्पित सदस्यों के संयुक्त प्रयास से संचालित होता है. उन्होंने कहा कि कठिन मार्ग से आने वाले कांवड़ियों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना ही संघ का प्रमुख उद्देश्य है.

गौरतलब है कि श्रद्धालु ओड़िशा के वेदव्यास संगम से पवित्र जल लेकर लगभग 110 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा के बाद महादेवसाल शिव मंदिर पहुंचते हैं. घने जंगलों, पथरीले रास्तों और पहाड़ी क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली इस यात्रा के दौरान बिश्रा, जराइकेला,मनोहरपुर और पोसैता सहित विभिन्न स्थानों पर स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा सेवा शिविर लगाए जाते हैं.

चक्रधरपुर रेल मंडल के हावड़ा मुंबई रेल मार्ग मनोहरपुर-गोइलकेरा मार्ग पर स्थित महादेवसाल शिव मंदिर, जिसे झारखंड का 'मिनी बाबा धाम' भी कहा जाता है, सावन माह में झारखंड, ओड़िशा सहित देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले हजारों शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है.

संघ की स्थापना से लेकर अब तक वरिष्ठ सदस्य नंदलाल साह, अर्जुन साह (मुन्नू सेठ), यदुनंदन साह (साधु जी), कमल कौशल, आनंद अग्रवाल, अमित प्रसाद, रवी कुमार साव, विक्की सिंह, सूरज मिश्रा, पंकज मूलचंदानी, सोनू सिंह, मोनू सिंह, सरदार प्रताप सिंह, राजेश जायसवाल, बिनोद गुप्ता, प्रशांत साहू, विकास साहू, दिलीप गुप्ता, पूजा यादव एवं भारती कुमारी सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सेवा कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया. सभी स्वयंसेवकों ने पूरे समर्पण के साथ कांवड़ियों की सेवा कर शिविर को सफल बनाया.

यह आयोजन एक बार फिर इस संदेश को सशक्त करता है कि 'सेवा ही सच्ची भक्ति है.' कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सहयोग, समर्पण और सामाजिक एकता का भी प्रेरणादायी उदाहरण है.

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