अरुण कुमार यादव/न्यूज11 भारत
गढ़वा/डेस्क: मानव जब जोर लगाता है तो पत्थर भी पानी बन जाता है.. इसी कविता को चरितार्थ किया है गढ़वा जिले के एक किसान मनोज भुईहर ने.गढ़वा जिले जिला से 60 किलोमीटर दूर रमकंडा प्रखंड के बिराजपुर पंचायत के दुर्जन गांव के किसान मनोज भुईहर ने इस नौतपा के भीषण गर्मी मे एक एकड़ यानी 27 कठ्ठा भूमि पर मिर्च की खेती कर आत्मनिर्भर बन रहें हैं, खबर यही नहीं खत्म होती है.
बता दें कि यह जो एक एकड़ मे मिर्च की खेती करने के लिए पानी की भारी किल्ल्त के कारण मनोज भुईहर ने खुद से पहले एक कुआं खोदा उसके बाद निजी खर्च से उसकी ऊपर के हिस्से को बंधवाया और उसके बाद ड्रिप विधि के द्वारा छत्तीसगढ़ के तर्ज पर उन्होंने मिर्च की खेती शुरू की जिसका परिणाम आज के यह भीषण गर्मी मे मनोज भुईहर के खेत हरी मिर्च से लह लहा रही है.किसान मनोज भुईहर बताते हैं की सरकार के द्वारा मुझे कृषि के क्षेत्र मे सरकारी कोई लाभ नहीं मिली है.
अगर मिली होती और बेहत्तर कर पाते, वहीं अब उनके साथ मिर्च की खेती मे उनके पत्नी और बेटे अभिषेक का भी साथ मिल रहा है जिससे उनके इस पहल को और मजबूती मिली, वहीं मनोज का यह भी कहना है की छतीसगढ़ राज्य सहित रांची गुमला सहित कई जिले मे भुईहर समाज आदिवासी कटेगरी में शामिल हैं जिससे उनलोगों को तो लाभ मिल रहा लेकिन पलामू गढ़वा के भुईहर समाज के लोगों को जेनरल कटेगरी में होने के कारण बच्चों को नौकरी भी नसीब नहीं है,ऐसे में पूरा परिवार अब तन और मन से मिर्च के खेती में जुट गएँ है जहाँ अब किसान मनोज भुईहर अपने आप को आत्मनिर्भर के दिशा में जो कदम बढ़ाया है उसे कह सकतें हैं की इंसान को कुछ कर गुजरने की चाहत होती है तो किसी भी संसाधन की रोना नहीं रोता है.वहीं किसान मनोज भुईहर से और भी किसानों की प्रेरणा लेने की जरूरत है ताकी वे भी आत्मनिर्भर बन सकें.
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