MMDR संशोधन बिल 2026: सीएम हेमंत सोरेन ने PM मोदी से पुनर्विचार का किया आग्रह, राहुल गांधी से भी मांगा समर्थन 

Dipali Kumari

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर इस पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की अपील की है.

न्यूज़11 भारत 
राँची/डेस्क: 
संसद से पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर झारखंड सरकार ने चिंता जताई है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर इस पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की अपील की है. सीएम ने कहा कि इस विधेयक से झारखंड को खनन से मिलने वाले राजस्व में कमी आ सकती है, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पत्र में प्रस्तावित सेक्शन 9D पर सबसे ज्यादा चिंता जताई है. उनका कहना है कि इससे खनिजों और खनिज वाली जमीन पर टैक्स, सेस या दूसरे शुल्क लगाने का राज्य का अधिकार सीमित हो सकता है. झारखंड सरकार का मानना है कि इससे राज्य की आर्थिक ताकत और राजस्व पर असर पड़ेगा. सरकार ने कहा कि यह अधिकार सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2024 के फैसले में राज्यों को दिया था.

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में सुप्रीम कोर्ट के Mineral Area Development Authority बनाम Steel Authority of India Ltd. मामले के फैसले का हवाला दिया है. झारखंड सरकार के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को खनिज वाली जमीन पर टैक्स लगाने का अधिकार दिया था. इसी के आधार पर झारखंड विधानसभा ने Jharkhand Mineral Bearing Land Cess Act, 2024 बनाया. इसके बाद अक्टूबर 2024 में इससे जुड़े नियम भी लागू किए गए. इन नियमों के तहत खनिज वाली जमीन से सेस वसूलकर उससे सड़क, बुनियादी ढांचे और सामाजिक विकास के काम करने की व्यवस्था की गई है.

मुख्यमंत्री के पत्र के अनुसार, झारखंड के गैर-कर राजस्व का बड़ा हिस्सा खनन से आता है.  झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक 2024-25 में राज्य को खनन क्षेत्र से करीब 1,379 करोड़ रुपये, जबकि 2025-26 में करीब 7,488 करोड़ रुपये मिले. वहीं वर्तमान वर्ष 2026-27 में करीब 13,215 करोड़ रुपये की आय का अनुमान है. मुख्यमंत्री ने कहा कि खनन से मिलने वाला यह पैसा राज्य की आर्थिक और वित्तीय व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. 

सीएम हेमंत सोरेन ने आशंका जताई है कि यदि खनिजों से राजस्व जुटाने की राज्य की शक्ति सीमित या समाप्त होती है, तो झारखंड को हर साल हजारों करोड़ रुपये के संभावित राजस्व से वंचित होना पड़ सकता है. इसका सीधा असर विकास योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों और खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए किए जाने वाले कार्यों पर पड़ सकता है.