संतोष श्रीवास्तव/न्यूज़ 11भारत
पलामू/डेस्क: पलामू जिले के लेस्लीगंज थाना क्षेत्र के ढेला गांव स्थित आशीर्वाद हॉस्पिटल एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गया है. स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक चौकसी को ठेंगा दिखाते हुए इस अस्पताल में कथित झोलाछाप डॉक्टर की घोर लापरवाही के कारण प्रसव के दौरान एक और नवजात शिशु की मौत हो गई. घटना के बाद से पीड़ित परिजनों में भारी आक्रोश है और पूरे क्षेत्र में इस अवैध अस्पताल के संचालन को लेकर तीखे सवाल खड़े हो रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है, बल्कि यह अस्पताल पहले भी कई महिलाओं और नवजात शिशुओं की जान ले चुका है, लेकिन हर बार प्रशासनिक कार्रवाई को ढाल बनाकर यह दोबारा खड़ा हो जाता है.
कमीशन के लालच में सहिया ने उजाड़ी गोद.
मृत नवजात के पिता संजीत राम और मां प्रिया कुमारी, जो बरवाडीह थाना क्षेत्र के पोखरी गांव के निवासी हैं, ने रोते हुए अस्पताल प्रबंधन और स्थानीय स्वास्थ्य सहिया पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. परिजनों का कहना है कि गांव की स्वास्थ्य सहिया अंजू देवी बेहतर इलाज और सुरक्षित प्रसव का भरोसा देकर उन्हें बहला-फुसलाकर आशीर्वाद हॉस्पिटल लेकर आई थी. आरोप है कि सरकारी अस्पताल ले जाने के बजाय सहिया मोटे कमीशन के लालच में गर्भवती महिला को इस निजी क्लीनिक में ले गई, जहां प्रसव के दौरान न तो कोई योग्य चिकित्सक मौजूद था और न ही पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध थीं. उचित देखरेख के अभाव में तड़पते हुए नवजात ने दुनिया में आने से पहले ही दम तोड़ दिया.
जांच में हुआ बड़ा खुलासा, चतरा में हैं 'कागजी डॉक्टर' और मौके पर मिला झोलाछाप
घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया. पलामू के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव, नीलांबर-पीतांबरपुर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजीव रंजन तथा लेस्लीगंज थाना के एसआई विक्रम शील दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की गहन जांच की. जांच के दौरान जो सच सामने आया, उसने अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए. कागजातों के अनुसार अस्पताल का निबंधन डॉ. अभिजीत आनंद के नाम पर कराया गया है, जबकि वे वर्तमान में चतरा में कार्यरत हैं. वहीं ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक के रूप में डॉ. जन्मेजय का नाम दर्ज था, लेकिन जांच के दौरान अस्पताल में कोई भी डिग्रीधारी चिकित्सक मौजूद नहीं मिला. मौके पर केवल अस्पताल का मुख्य संचालक और कथित झोलाछाप विकास कुमार कुशवाहा पाया गया, जो बिना किसी योग्यता के मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा था.
सील हुआ तो 'न्यू' नाम रखकर फिर खोल दी मौत की दुकान
प्रशासनिक जांच में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब यह पता चला कि पूर्व में हुई मौतों के बाद जिस आशीर्वाद हॉस्पिटल को प्रशासन ने सील कर दिया था, उसे एक सोची-समझी साजिश के तहत दोबारा चालू कर लिया गया. संचालक विकास कुमार कुशवाहा ने उसी बिल्डिंग में, उसी पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ बस बोर्ड बदलते हुए "न्यू आशीर्वाद हॉस्पिटल" के नाम से नया निबंधन हासिल कर लिया और दोबारा अपनी दुकान सजा ली. एक ही अस्पताल से जुड़े दो अलग-अलग निबंधनों का यह मामला सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली को भी कटघरे में खड़ा करता है कि आखिर बिना भौतिक सत्यापन के एक दागी संचालक को दोबारा लाइसेंस कैसे मिल गया.
अस्पताल को दोबारा किया गया सील, उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल
प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अस्पताल को एक बार फिर से सील कर दिया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है. पलामू सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है और एक ही जगह पर नाम बदलकर अस्पताल का दोबारा संचालन करना नियमों का खुला उल्लंघन है. इस पूरे मामले में लिप्त संचालक, सहिया और नामधारी डॉक्टरों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी की जा रही है. हालांकि, इस कार्रवाई के बाद भी जनता के बीच यह सवाल बड़ा होकर गूंज रहा है कि जब अस्पताल की बिल्डिंग वही है, संचालक वही है और उसकी जानलेवा व्यवस्था भी वही है, तो सिर्फ नाम का बोर्ड बदल जाने से प्रशासन की आंखें क्यों बंद हो जाती हैं और इस बार-बार होने वाली मौतों का असली जिम्मेदार कौन है.
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