हूल दिवस पर याद आया पाकुड़ का इतिहास: 170 साल बाद भी संथाल विद्रोह की गवाही दे रहा मार्टिलो टावर

Pramod Kumar,News11 Bharat,

856 में तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी सर मार्टिन ने टावर का निर्माण कराया था

न्यूज11  भारत

पाकुड़/डेस्क: पाकुड़  हूल दिवस के मौके पर पाकुड़ का ऐतिहासिक मार्टिलो टावर एक बार फिर संथाल विद्रोह की वीर गाथाओं को याद दिला रहा है. जिला मुख्यालय स्थित शहीद सिद्धो-कान्हू मुर्मू पार्क में मौजूद यह टावर आज भी अंग्रेजी शासन और संथालों के संघर्ष की कहानी बयां करता है.

इतिहासकारों के अनुसार वर्ष 1856 में तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी सर मार्टिन ने इस टावर का निर्माण कराया था. बताया जाता है कि संथाल विद्रोह के दौरान अंग्रेजी सैनिकों ने संथाल आंदोलनकारियों पर नजर रखने और उनका मुकाबला करने के लिए इस टावर का इस्तेमाल किया था.

जानकारों के मुताबिक अंग्रेजों के अत्याचार और शोषण के खिलाफ बड़ी संख्या में संथाल आदिवासी पारंपरिक हथियारों के साथ धनुष पूजा गांव में जुटे थे. विद्रोह से पहले धनुष की पूजा किए जाने के कारण ही इस स्थान का नाम धनुष पूजा पड़ा.

कहा जाता है कि संथाल विद्रोह की सूचना मिलने के बाद अंग्रेजों ने रातों-रात मार्टिलो टावर का निर्माण कराया. करीब 27 फीट ऊंचे इस टावर का बाहरी व्यास लगभग 17 फीट है. इसमें 52 छिद्र, दो खिड़कियां और एक दरवाजा बना हुआ है. इन्हीं छिद्रों से अंग्रेज सैनिक संथाल विद्रोहियों पर नजर रखते थे और गोलियां चलाते थे.

यह भी पढ़ें: मल्लिकार्जुन खड़गे फिर बने राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष, आधिकारिक संसदीय बुलेटिन जारी