नीरज कुमार साहू/न्यूज11 भारत
बसिया/डेस्क: प्रखंड क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों शिक्षकों की भारी किल्लत और उनके असमान वितरण के कारण पटरी से उतरती नजर आ रही है. प्रखंड के कई सरकारी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात का संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है. आलम यह है कि कई विद्यालय महज एक या दो शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जबकि कुछ ऐसे स्कूल भी हैं जहाँ बच्चों की संख्या बहुत कम होने के बावजूद जरूरत से ज्यादा शिक्षक तैनात हैं.
बरई स्कूल का बुरा हाल: 100+ विद्यार्थी और सिर्फ 2 मास्टर साहब
शिक्षकों की इस किल्लत की बानगी प्रखंड के बरई स्थित विद्यालयमें साफ देखी जा सकती है. इस स्कूल में नामांकित छात्र-छात्राओं की संख्या 100 से अधिक है, लेकिन उन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी सिर्फ दो शिक्षकों के कंधों पर है.
विद्यालय के शिक्षक सुशील टेटे ने अपनी व्यथा और स्कूल की वास्तविक स्थिति साझा करते हुए बताया:"हमारे स्कूल में शिक्षकों की घोर कमी है. महज दो शिक्षकों के भरोसे पूरा विद्यालय चल रहा है. कई बार विभागीय या ऑफिशियल कार्यों के सिलसिले में हमें प्रखंड कार्यालय जाना पड़ता है. ऐसे में पीछे से स्कूल में बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो जाती है. हमने कई बार विभागीय आलाधिकारियों को आवेदन देकर स्कूल में पदस्थापन बढ़ाने की गुहार लगाई, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई."
मजबूरी की पढ़ाई: हिंदी के शिक्षक पढ़ा रहे गणित, साइंस और अंग्रेजी
- शिक्षकों की कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता पर पड़ रहा है. जहाँ विषयवार शिक्षकों का होना अनिवार्य है, वहीं बराई जैसे स्कूलों में शिक्षकों को मजबूरी में वे विषय भी पढ़ाने पड़ रहे हैं, जिनमें वे विशेषज्ञ नहीं हैं.
- बहुमुखी होने की मजबूरी:* हिंदी विषय के शिक्षक को मजबूरी में बच्चों को गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे कठिन विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं.
- भविष्य से खिलवाड़:* एक से दो शिक्षकों वाले इन स्कूलों में दिनभर सभी कक्षाओं को एक साथ जोड़कर (मल्टीग्रेड टीचिंग) जैसे-तैसे पढ़ाया जा रहा है, जिससे बच्चों की बुनियादी नींव कमजोर हो रही है.
प्रखंड में शिक्षकों के वितरण पर उठते सवाल
जहाँ एक तरफ बरई जैसे स्कूलों में 100 से ज्यादा बच्चों पर दो शिक्षक संघर्ष कर रहे हैं, वहीं प्रखंड में ही ऐसे भी कई स्कूल बताए जा रहे हैं जहाँ विद्यार्थियों की संख्या नाममात्र है, लेकिन वहाँ शिक्षकों की भरमार है. शिक्षा विभाग के इस असमान समायोजन और उदासीन रवैये के कारण जहाँ एक ओर बच्चों का भविष्य अधर में लटका है, वहीं ड्यूटी पर तैनात शिक्षक भी अतिरिक्त कार्यभार के कारण मानसिक दबाव महसूस कर रहे हैं.
अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की नींद खुलती है या बराई और बसिया के अन्य स्कूलों के बच्चे यूँ ही बदहाल व्यवस्था के सहारे पढ़ने को मजबूर रहेंगे.
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