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Rajasthan Politics: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर सीएम भजनलाल शर्मा का कांग्रेस पर हमला, CAA को बताया ऐतिहासिक कदम

Rajasthan Politics: जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में मंगलवार को आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस 2025 कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वर्ष 1947 के बंटवारे को दुनिया की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी करार दिया। उन्होंने कहा कि सत्ता की लालसा, तुष्टिकरण की राजनीति और स्वार्थ ने देश को दो हिस्सों में बांट दिया, जिसका परिणाम था लाखों लोगों की मौत और करोड़ों का विस्थापन। [caption id="attachment_99568" align="alignnone" width="287"] Rajasthan Politics[/caption]

Rajasthan Politics: कभी देश को जोड़ नहीं सकता

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि उसकी नीतियां और सत्ता मोह भारत के विभाजन के लिए जिम्मेदार रहे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से विस्थापित हिंदुओं को नागरिकता देने में कांग्रेस की सरकारें नाकाम रही हैं और उनकी संपत्ति के मुआवजे से भी इनकार किया गया। भजनलाल शर्मा ने कहा कि “जिसने देश को तोड़ा है, वह कभी देश को जोड़ नहीं सकता।”

Rajasthan Politics: अखंडता के संकल्प को मजबूत करने की प्रेरणा देता

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की सराहना करते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के माध्यम से उन पीड़ितों को न्याय दिलाने की कोशिश की गई है जो वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह दिवस राष्ट्र की एकता और अखंडता के संकल्प को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।

Rajasthan Politics: तो विभाजन को टाला जा सकता था

इस अवसर पर कार्यक्रम के प्रदेश संयोजक अशोक परनामी ने भी कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि देश का विभाजन कोई मजबूरी नहीं थी, बल्कि यह राजनीतिक मंजूरी और सत्ता की लालसा का परिणाम था। उन्होंने कहा कि अगर देश की बागडोर सरदार वल्लभभाई पटेल को मिली होती, तो विभाजन को टाला जा सकता था।

Rajasthan Politics: त्रासदी को न भूलें और उससे सबक ले सकें

परनामी ने पाकिस्तान से आए हिंदुओं को 'शरणार्थी' नहीं, बल्कि 'पुरुषार्थी' बताते हुए कहा कि वे अपने परिश्रम और समर्पण से भारत में नई पहचान बना रहे हैं। उन्होंने 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने के निर्णय को प्रधानमंत्री मोदी का ऐतिहासिक फैसला बताया, जिससे आने वाली पीढ़ियां इस त्रासदी को न भूलें और उससे सबक ले सकें। यह कार्यक्रम देश के विभाजन की पीड़ा को याद करने और राष्ट्रीय एकता के संकल्प को दोहराने का प्रतीक बनकर सामने आया।