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रांची/डेस्क: झारखंड के राशन कार्डधारियों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है. दरअसल सभी राशन कार्डधारियों से अब उनकी जाति पूछी जाएगी. राज्य के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना और राज्य खाद्य सुरक्षा योजना से जुड़े कुल 67,93,458 राशन कार्डधारकों को अपने कार्ड में अब जाति दर्ज करानी होगी. बताते चलें पुराने राशन कार्ड में जाति जुड़वाने या नया राशन कार्ड बनवाने के लिए केवल डिजिटल जाति प्रमाण पत्र ही स्वीकार किये जायेंगे. हालांकि आपको घबराने की जरूरत नहीं है. अगर कोई जाति प्रमाण पत्र नहीं दे पाता है, तब भी उसका राशन बंद नहीं किया जाएगा.
5 जुलाई से शुरू हो चुका है राशन कार्ड में जाति जुड़वाने का काम
राशन कार्ड में जाति दर्ज करने का काम जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) के दुकानदारों को सौंपी गयी है. राशन कार्ड में जाति जोड़ने का काम बीते 5 जुलाई से ही ऑनलाइन मोड में शुरू हो चुका है और अब तक कुल 319 राशन कार्ड पर जाति अंकित की जा चुकी है. राशन कार्ड में जाति जुड़वाने का काम तेजी से किया जा रहा है.
बताते चलें विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) को डिजिटल जाति प्रमाण पत्र देने की कोई आवश्यकता नहीं है. बीएसओ उनके बारे में जानकारी एकत्र कर राशन कार्ड में उनकी जाति अंकित करेंगे.
इसके अलावा सफेद राशन कार्ड धारकों को भी इस प्रक्रिया से बाहर रखा है. चूंकि सफेद राशन कार्ड वाले गरीब रेखा से ऊपर होते हैं और उन्हें राशन कार्ड पर कोई राशन का लाभ नहीं मिलता है, इसलिए सफेद राशन कार्ड वालों को अपने कार्ड में जाति अंकित कराने की कोई जरूरत नहीं है.
सरकार क्यों मांग रही है राशन कार्ड धारकों की जाति ?
अब कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सरकार राशन कार्ड धारकों को जाति अंकित कराने को क्यों कह रही है. दरअसल सरकार रियल टाइम सटीक आंकड़ा चाहती है कि किस जाति (एसटी, एससी, ओबीसी या सामान्य वर्ग) के कितने लोगों को पीडीएस का लाभ मिल रहा है. इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि सरकारी योजनाओं का लाभ किस वर्ग तक सबसे ज्यादा पहुंच रहा है और कौन सा वर्ग इससे वंचित है. इसके अलावा भविष्य में किसी विशेष जाति या वर्ग के लिए नई कल्याणकारी योजनाएं शुरू करने या राशन कोटे में बदलाव करने के लिए इस डेटा का इस्तेमाल किया जा सकता है.
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