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पाकुड़/डेस्क: पाकुड़ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा पी.एन. पनिक्कर' के सम्मान में 19 जून से 18 जुलाई के बीच 'पी.एन. पनिक्कर राष्ट्रीय पठन और डिजिटल पठन माह' के अंतर्गत पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु पठन माह का आयोजन किया गया. पी. एन. पनिक्कर (पुथुवायिल नारायण पनिक्कर) का जन्म 1 मार्च 1909 को केरल में हुआ था. उन्हें "भारत में पुस्तकालय आंदोलन के जनक के रूप में जाना जाता है. उन्होंने समाज में पढ़ने की आदत और पुस्तकालय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया. केरल राज्य को भारत में सर्वप्रथम पूर्ण साक्षर बनाने के लिए उनके द्वार व्यापक पुस्तकालय आंदोलन शुरू हुआ, जिसने ना सिर्फ केरल को बल्कि पूरे देश को प्रेरित किया.इस अवसर पर डी पी एस के प्रांगण में विद्यार्थियों के लिए अनेक ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक गतिविधियों का आयोजन किया गया.
19 जून से 18 जुलाई तक चलने वाले इस पठन -पाठन कार्यक्रम का शुभारंभ 'फादर ऑफ द लाइब्रेरी मूवमेंट' पी. एन. पनिक्कर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालकर किया गया. विद्यार्थियों को उनके जीवन एवं पुस्तकालय आंदोलन में दिए गए अमूल्य योगदान पर आधारित प्रेरणादायक डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई, साथ ही साथ विद्यार्थियों को ज्ञान के क्षेत्र में अध्ययन एवं पुस्तकालय के महत्व के बारे में भी समझाया गया.
सीबीएसई के निर्देशानुसार आयोजित गतिविधियों के अंतर्गत विद्यालय परिसर में रीडिंग अवेयरनेस रैली निकाली गई. रैली के माध्यम से विद्यार्थियों ने "रीड एंड ग्रो ", "पढ़ेगा भारत, बढ़ेगा भारत" तथा "पुस्तकें हैं सच्ची मित्र" जैसे प्रेरक नारों के साथ समाज में पढ़ने की आदत विकसित करने का संदेश दिया.
इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों के लिए पठन संकल्प , क्विज़ प्रतियोगिता, कविता वाचन, शब्दावली विकास गतिविधि, तथा पठन संस्कृति को प्रोत्साहित करने वाली रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया. इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों में आजीवन अध्ययन की आदत विकसित करना तथा पुस्तकालय के महत्व के प्रति जागरूक करना था.
विद्यालय के निदेशक अरुणेंद्र कुमार ने कहा, "पुस्तकें ज्ञान, संस्कार और व्यक्तित्व विकास का सबसे सशक्त माध्यम हैं. डिजिटल युग में भी नियमित पठन की आदत विद्यार्थियों को आत्मविश्वासी, रचनात्मक और जागरूक नागरिक बनाती है. हमें बच्चों में पढ़ने की संस्कृति विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए."
विद्यालय के प्रधानाचार्य जे. के. शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा, "पी. एन. पनिक्कर का जीवन हमें ज्ञान के प्रसार और पुस्तकालय संस्कृति को जन-जन तक पहुँचाने की प्रेरणा देता है. सीबीएसई द्वारा संचालित यह पठन माह विद्यार्थियों में पुस्तकों के प्रति प्रेम, जिज्ञासा और आजीवन सीखने की भावना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. प्रत्येक विद्यार्थी को प्रतिदिन पुस्तकालय का उपयोग कर अपने ज्ञान का विस्तार करना चाहिए."
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने नियमित रूप से पुस्तकें पढ़ने, पुस्तकालय का सदुपयोग करने तथा समाज में पठन संस्कृति को बढ़ावा देने का संकल्प लिया. विद्यालय परिवार ने इस आयोजन को अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायी बताते हुए इसे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना.