सिमडेगा का 'काला सोना' बना ग्रामीणों की कमाई का सहारा, यूपी-बिहार तक पहुंचा जामुन का स्वाद

Vaibhaw Vikram

न्यूज11 भारत
सिमडेगा/डेस्क:
मूलतः वनोपद पर टिकी सिमडेगा की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जंगलों का काला सोना कहे जाने वाले जामुन ने एक नया आयाम दिया है. सिमडेगा के जामुन का स्वाद अब यूपी बिहार तक फैलने लगा है. जिसका सीधा लाभ सिमडेगा के ग्रामीणों को मिलने लगा है. झारखंड के दक्षिण छोर पर स्थित जंगलों पहाड़ों से आच्छादित सिमडेगा जिला अपने अच्छे क्वालिटी के वनोपद के लिए पूरे राज्य भर में अपना अलग स्थान रखता है. सिमडेगा की माटी में एक सबसे बड़ी खासियत है कि यहां वनोपद अन्य जगहों की तुलना में जल्द तैयार होते हैं. इसी वनोपाद में एक सबसे महत्वपूर्ण रसीला और गुणों से भरपूर फल जामुन है. जिसे जंगल का काला सोना भी कहा जाता है. वैसे तो जामुन अमूमन 15 जून के बाद पकने शुरू होते हैं. लेकिन सिमडेगा की जंगलों की आबोहवा यहां के जामुन को मई के अंतिम सप्ताह से लेकर जून के पहले सप्ताह के बीच पका कर तैयार करने लगती है. सिमडेगा के ग्रामीण इनदिनों पौ फटते हीं जंगलों में जाकर बड़ी सावधानी से जामुन के फलों को एकएक कर तोड़ते हैं. जिससे जामुन जमीन पर गिरकर खराब ना हो. 

इसके बाद वे इस जामुन को सिमडेगा के बाजारों तक लाकर बेचते हैं. लेकिन लोकल बाजारों में जामुन के अच्छे मूल्य नहीं मिलते हैं. जिससे कभी कभी ग्रामीणों को निराश भी होना पड़ता है. लेकिन पिछले वर्ष से सिमडेगा के स्थानीय व्यापारी ग्रामीणों से सीधे जामुन खरीद कर यूपी बिहार और बंगाल तक सप्लाई करने लगे. जहां लोगों को सिमडेगा के मीठे और रसीले जामुन का स्वाद खूब भाया और इसकी डिमांड बढ़ने लगी. जिससे  यहां के ग्रामीणों को भी जामुन के अच्छे मूल्य मिलने लगे हैं. अब तो यहां के पढ़ने वाले बच्चे भी छुट्टी के दौरान जामुन बेचकर अपने साल भर के पढ़ाई का खर्च निकालने लगे हैं.

यहां के व्यापारियों की माने तो कोलकाता सहित पटना और वाराणसी में सिमडेगा के जामुन हाथोंहाथ बिक जाते हैं. इस बार हर दिन 11 से 15 टन जामुन निर्यात किया जा रहा है. व्यापारी ने बताया कि एक सीजन में सिमडेगा से ढाई से तीन करोड़ रुपए का 600 टन जामुन निर्यात किया जा रहा है. जिसका सीधा लाभ ग्रामीणों को मिलता है. जामुन का निर्यात बढ़ा तो सौ, पचास में स्थानीय स्तर पर जामुन बेचने वाले ग्रामीणों को अब हजारों का लाभ मिलने लगा है. जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ होने लगी है.

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